नई दिल्ली। भारत में नई शिक्षा नीति के तहत 11वीं कक्षा के छात्र अब पारंपरिक ‘आर्ट्स, कॉमर्स और साइंस’ की सीमाओं में बंधे नहीं हैं, बल्कि अपना मनपसंद विषय चुन सकते हैं। इस नई शिक्षा नीति की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:–
स्ट्रीम सिस्टम का अंत: पहले छात्रों को केवल एक स्ट्रीम (जैसे विज्ञान या कला) चुननी पड़ती थी। अब छात्र अपनी पसंद के अनुसार मल्टी-डिसिप्लिनरी (बहु-विषयक) कॉम्बिनेशन ले सकते हैं। उदाहरण के लिए, अब एक छात्र फिजिक्स के साथ इतिहास या मैथ्स के साथ म्यूजिक की पढ़ाई कर सकता है।
विषयों की पूल प्रणाली: अधिकांश बोर्ड्स ने विषयों को अलग-अलग ‘पूल’ में बांट दिया है। छात्रों को इन पूल्स में से अपनी पसंद के मेजर और माइनर विषय चुनने की स्वतंत्रता मिलती है। कौशल विकास: अकादमिक विषयों के साथ-साथ छात्र अब कोडिंग, फैशन डिजाइनिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या डेटा साइंस जैसे व्यावसायिक विषयों को भी मुख्य विषय के रूप में चुन सकते हैं।
लचीलापन: यदि किसी छात्र को लगता है कि उसने ग़लत विषय चुन लिया है, तो सत्र की शुरुआत में विषय बदलने की प्रक्रिया को पहले से अधिक सरल बनाया गया है। रटने की जगह समझ पर जोर: विषयों का चयन अब करियर के दबाव के बजाय छात्र की रुचि और योग्यता पर आधारित करने की कोशिश की जा रही है। क्यों ज़रूरी था यह बदलाव? पुराने सिस्टम में छात्रों पर एक खास खांचे में फिट होने का दबाव था। नई व्यवस्था से छात्रों को अपने व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं को निखारने और भविष्य के ‘इंटर-डिसिप्लिनरी’ जॉब मार्केट के लिए तैयार होने में मदद मिलेगी।





























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