विश्व की कोई भी राजसत्ताएं, यदि पाँच महत्त्वपूर्ण बिन्दुओं पर कार्य कर दें, तो वह देश देखते-देखते विश्वगुरु बन सकता है, उन्नति के पथ पर बढ़ते रह सकता है। चूँकि पाँच चीजों से ही सभी धारायें जुड़ी हुई हैं, विकास की भी और पतन की भी। अच्छा कार्य कर लो, तो उसमें विकास की उच्चता की श्रेणी तय कर लोगे और जितना पतन के मार्ग पा जाओगे, तो वह देश उतना ही पतन के मार्ग पर चलता चला जायेगा तथा वे पाँच बिन्दु हैं- नशामुक्त राष्ट्र का निर्माण, भ्रष्टाचारमुक्त राष्ट्र का निर्माण, जनसंख्या नियंत्रण, अभिव्यक्ति की आज़ादी की सीमा और राष्ट्रद्रोह।
नशामुक्त राष्ट्र का निर्माण-
अगर कोई राष्ट्रभक्त है और वह नशामुक्त राष्ट्र के निर्माण के लिए कार्य नहीं कर रहा है, तो वह राष्ट्रभक्त कहलाने का अधिकारी नहीं है, चूँकि कोई राष्ट्र तभी उन्नति के पथ पर चल सकता है, जब वह नशामुक्त होजाए। राष्ट्र को नशामुक्त करा दिया जाए, तो हम देश की लाखों-करोड़ों जनता को बचाने में सफल हो जायेंगे, उनको पतन के मार्ग पर जाने से रोकने में सफल हो जायेंगे। सि$र्फ नशे के कारण अनेक प्रकार के अपराध पनप रहे हैं, अनेक प्रकार की बीमारियों से लोग ग्रसित हो रहे हैं। अत: प्रथम आवश्यकता है राष्ट्र को नशामुक्त बनाना, जिसके लिए मेरे द्वारा सतत प्रयास किया जा रहा है। अपने हज़ारों-हज़ारों, लाखों स्वयंसेवी कार्यकर्ताओं के माध्यम से देश के कोने-कोने में देश को नशामुक्त बनाने का कार्य किया जा रहा है।
भ्रष्टाचारमुक्त राष्ट्र का निर्माण-
कोई $कानून बनाओ, बल्कि सैकड़ों $कानूनों से ज़्यादा सबसे पहले यह $कानून बनाने की ज़रूरत है कि ऐसा भ्रष्टाचारमुक्त राष्ट्र बना सकें, जिसमें सख्त से सख्त सजाएं हों। राष्ट्र में अगर कुछ कार्य करना है, तो योजनाओं को समेट करके एक कोने में रख दो और सबसे पहला यदि कार्य करना है, तो भ्रष्टाचारमुक्त राष्ट्र बनाने का कार्य करना है। अगर राष्ट्र भ्रष्टाचारमुक्त हो जायेगा, तो देखते-देखते उन्नति चरमसीमाओं पर चली जायेगी। भ्रष्टाचार के ही परिणाम हैं कि जो इत्र के धनकुबेरों को आपने देखा कि इतनी बड़ी-बड़ी तिजोडिय़ाँ भरी पड़ी हैं। यह तो आंशिक तौर पर लाखों में एक-दो पकड़े जाते हैं, जबकि लुटेरे पूरे देश को लूट रहे हैं और देश में किसी भी सरकार ने चाहे बीजेपी हो, कांग्रेस हो या अन्य पार्टियाँ हों, किसी ने भी भ्रष्टाचार के विरुद्ध मुखर होकरके आवाज़ नहीं उठाई और न ही इस दिशा में कार्य किए गए। कार्य सभी के जीरो हैं।
जनसंख्या नियंत्रण-
कोई राष्ट्र तभी आगे बढ़ सकता है, जब उसमें जनसंख्या नियंत्रण के सख्त $कानून बनाए जायें। यह किसी जाति, धर्म, सम्प्रदाय की बात नहीं है। जनसंख्या नियंत्रण यदि कर लिया जाए, तो राष्ट्र उन्नति के पथ पर बढ़ता चला जायेगा, अन्यथा हज़ारों योजनाएं लाते रहो, हज़ारों उद्योग लगाते रहो, जनसंख्या यदि आगे बढ़ती चली गई, तो राष्ट्र कभी भी सुरक्षित नहीं रहेगा, कभी एक नहीं रहेगा, कभी एकता रह नहीं सकती और वहाँ पर सम्प्रदायिकता की आग लगती ही रहेगी। अत: आवश्यकता है कि नशामुक्त राष्ट्र का निर्माण, भ्रष्टाचारमुक्त राष्ट्र का निर्माण तथा जनसंख्या नियंत्रण हो और चौथा जो सबसे महत्त्वपूर्ण है, अभिव्यक्ति की आज़ादी की सीमा ।
अभिव्यक्ति की आज़ादी की सीमा –
किसी भी राष्ट्र को सुरक्षित रखना है, तो अभिव्यक्ति की आज़ादी की सीमाएं तय करनी पड़ेंगी और जब तक हम अभिव्यक्ति की सीमाएं तय नहीं करेंगे, तो निश्चित है कि वाणी में सबसे बड़ी ता$कत होती है। सबकुछ वाणी के फलस्वरूप ही चल रहा है तथा अभिव्यक्ति के माध्यम से देश को टुकड़ों-टुकड़ों में बाँटा जा सकता है और अभिव्यक्ति के माध्यम से देश को एकता के सूत्र मेंं पिरोया जा सकता है। अत: अभिव्यक्ति की आज़ादी की सीमाएं तय होनी चाहिएं, उसको परिभाषित किया जाना चाहिए और अगर कोई उन सीमाओं का उल्लंघन करे, तो उसके लिए कठोर से कठोर दंड दिए जाने के प्रावधान बनने चाहिए।
राष्ट्रद्रोह-
राष्ट्र को अगर हम जीवंत मानते हैं, तो जिस तरह किसी जीवंत व्यक्ति के ऊपर कोई हमला करता है, आक्रमण करता है, तो उसे अपराध की श्रेणी में लिया जाता है, उसी तरह राष्ट्रद्रोह करने वाले को सबसे बड़ा अपराधी माना जाना चाहिए। सभी अपराधों से बढ़ करके राष्ट्रद्रोही के लिए सख्त से सख्त सजा का प्रावधान होना चाहिए। राष्ट्रद्रोह किन-किन बिन्दुओं पर, किस-किस प्रकार से हो सकता है, इसे गहराई से परिभाषित करने की ज़रूरत है?
इन पाँच बिन्दुओं पर यदि सरकारें ईमानदारी से कार्य करना प्रारम्भ कर दें, तो बाकी सभी चीजें सुव्यवस्थित रूप से चलनी शुरू हो जायेंगी।





























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जय माता की जय गुरुवर की