नई दिल्ली। अगर रिकार्ड में ही जाति प्रमाण न हो तो उसे आरक्षण का लाभ कैसे मिल रहा है? इसे बांबे हाई कोर्ट ने $कानूनी कसौटी पर परखने का फैसला किया है। दरअसल मुसलमानों में किसी रिकार्ड में जाति लिखने का प्रचलन नहीं है। सवाल यह है कि अगर कोई व्यक्ति रिकार्ड में जाति या उपजाति का उल्लेख नहीं करता है, तो उसे आरक्षण का लाभ कैसे मिल सकता है?
निर्धारित व्यवस्था के तहत आरक्षण पाने के लिए सक्षम अथारिटी से जारी जाति प्रमाणपत्र पेश करना पड़ता है। नौकरी में या शिक्षण संस्था में दाखिले के लिए आरक्षण का लाभ लेने के लिए आवेदक जाति प्रमाणपत्र लगाता है और इसके बावजूद कई बार संबंधित विभाग या राज्य की कास्ट स्क्रूटनी कमेटी (जाति की जांच करने वाली समिति) जांच करके पता लगाती है कि वास्तव में आवेदक आरक्षित वर्ग या जाति से है या नहीं।
बांबे हाई कोर्ट ने जुवेरिया रियाज अहमद शेख बनाम महाराष्ट्र सरकार मामले में सात अप्रैल को दिए आदेश में मुसलमानों में रिकार्ड में जाति का उल्लेख नहीं करने की प्रथा को $कानूनी तौर पर परखने का निर्णय तब लिया जब याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि कुछ प्रासंगिक दस्तावेजों में याचिकाकर्ता के रिश्तेदारों की जाति का उल्लेख नहीं होने को कास्ट स्कुटनी कमेटी को आधार नहीं बनाना चाहिए था, क्योंकि बांबे हाई कोर्ट के कई पूर्व फैसलों में कहा जा चुका है कि मुसलमानों में जाति का उल्लेख करने का प्रचलन नहीं है।
दलील के समर्थन में हाई कोर्ट के चार $फरवरी 2021 और 22 दिसंबर 2020 के दो पूर्व फैसलों का हवाला दिया गया, जिनमें कहा गया था कि मुसलमानों के संबंध में यह तय $कानूनी व्यवस्था है कि उनमें रिकार्ड में जाति का उल्लेख करने का प्रचलन नहीं है। मामले की सुनवाई अब मई होगी।
आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था में मुसलमानों को अनुसूचित जाति वर्ग का आरक्षण नहीं मिलता। उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण का ही लाभ मिलता है। केंद्र सरकार के एक उच्च अधिकारी कहते हैं कि केंद्र की ओबीसी सूची में मुसलमान नाम से कुछ नहीं है। लेकिन जैसे बुनकर हैं और अगर वे मुस्लिम हैं तो उन्हें प्रमाणपत्र मिलता है। बहुत से मुसलमानों को ओबीसी प्रमाणपत्र मिलता है। अगर किसी समुदाय का नाम ओबीसी सूची में है और व्यक्ति उसमें आता है और आवेदन करता है तो उसे प्रमाणपत्र मिलता है।
बहुत जगह मुसलमान जाति का जिक्र करते हैं, जैसे मोमिन हैं या कुछ और, उनको उसके आधार पर प्रमाणपत्र मिलता है। जैसे मुस्लिम जुलाहा समुदाय से है तो उसे भी अन्य की तरह यह साबित करना पड़ेगा कि वह जुलाहा है, तभी उसे प्रमाणपत्र मिलेगा। लेकिन यह बड़ा विषय है कि लिखित रूप से रिकार्ड में आए बगैर किसी चीज को प्रमाणित कैसे किया जा सकता है?





























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