डिंडौरी। डिंडौरी जिले में प्रस्तावित राघवपुर बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर प्रभावित किसानों और ग्रामीणों का आक्रोश गुरुवार को देखने को मिला।
नियमों की अनदेखी और जबरन भूमि अधिग्रहण का आरोप लगाते हुए मुड़िया कला और आसपास के गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने गुरुवार को जबलपुर-अमरकंटक नेशनल हाईवे पर चक्काजाम कर जोरदार प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन के कारण हाईवे पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया था और तपती धूप में यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। प्रदर्शन कर रहे आदिवासी ग्रामीणों और प्रभावित किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासन पांचवीं अनुसूची के नियमों और पेसा कानून का सरेआम उल्लंघन कर रहा है।
सहमति की अनदेखी: जनप्रतिनिधियों का कहना है कि आदिवासी क्षेत्रों में किसी भी परियोजना के लिए ग्राम सभा की सहमति जरूरी है, लेकिन यहाँ इसे दरकिनार कर दिया गया।
दस्तावेजों में गड़बड़ी: ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जनसुनवाई के सरकारी दस्तावेजों में गड़बड़ी की गई है और कुछ जगह नकली हस्ताक्षर तक किए गए हैं। पेड़ों की अवैध कटाई: बिना किसी अंतिम फैसले या उचित मुआवजे के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पेड़ों को काटा जा रहा है।
समझाइश के बाद खुला जाम: चक्काजाम की सूचना मिलते ही डिंडौरी एसडीएम, एसडीओपी सतीश द्विवेदी, सिटी कोतवाली प्रभारी और भारी पुलिस बल मौके पर पहुँच गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से लंबी चर्चा की। एसडीएम ने ग्रामीणों की आपत्तियों और मांगों से जुड़ा एक ज्ञापन लिया और भरोसा दिलाया कि इसे वरिष्ठ अधिकारियों और राज्यपाल के समक्ष भेजा जाएगा। प्रशासन के लिखित आश्वासन और निष्पक्ष जांच के वादे के बाद शाम करीब साढ़े चार बजे ग्रामीणों ने अपना धरना समाप्त किया, जिसके बाद पुलिस ने यातायात को दोबारा बहाल कराया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी संवैधानिक मांगों पर अमल नहीं हुआ, तो वे और बड़ा उग्र आंदोलन करेंगे।




























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