ग्रीष्म ऋतु में सूरज बहुत जल्दी निकलता है और दिन बहुत लंबे होते हैं। धूप तेज होने के बाद घर से बाहर निकलना या कोई भी काम करना बेहद थका देने वाला होता है। प्राकृतिक चिकित्सा और आध्यात्मिक विज्ञान के अनुसार, गर्मियों में स्वस्थ रहने का सबसे पहला और अनिवार्य नियम है- अपनी दिनचर्या को सूर्य के साथ जोड़ना।
प्रातःकाल का ‘ब्रह्म मुहूर्त’ (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटे पहले का समय) केवल शरीर को ही नहीं, बल्कि हमारी चेतना को परम शांति और ऊर्जा देने का समय है।
ब्रह्म मुहूर्त: ओजोन और प्राण ऊर्जा का खजाना
गर्मियों की सुबह हवा में प्रदूषण सबसे कम होता है और नवजात ऑक्सीजन (Ozone) सबसे अधिक होती है।
जब हम सुबह 4:30 से 5:30 के बीच उठकर खुली हवा में सांस लेते हैं, तो यह शुद्ध ऑक्सीजन हमारे रक्त को साफ करती है और दिन भर की भयंकर गर्मी सहने के लिए शरीर को तैयार करती है।
यह समय अपनी आत्मा को ‘जगत जननी’ (Mother Nature) की उस सर्वव्यापी कॉस्मिक ऊर्जा से जोड़ने का है, जो हमारे भीतर की सारी नकारात्मकता और पित्त (क्रोध) को शांत कर देती है।
– कार्यकारी संपादक, बृजपाल सिंह चौहान (एन. डी.) नेचुरोपैथी




























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