नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक झटकों के बीच सबसे मज़बूत और लचीली उभरती अर्थव्यवस्था बनकर उभरी है। मूडीज ने मई 2026 में अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत को वैश्विक आर्थिक ‘सुपरपावर’ बनने की दिशा में अग्रसर है।
रिपोर्ट की मुख्य बातें और भविष्य के अनुमान नीचे दिए गए हैं–
आर्थिक वृद्धि: भारत 2024-2027 के दौरान 20 देशों में सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा। मूडीज का अनुमान: वर्ष 2025 के लिए 6.6 प्रतिशत और 2026 के लिए 6.4 प्रतिशत की दर से वृद्धि का अनुमान है। हालांकि, पश्चिम एशिया के तनाव के कारण कुछ रिपोर्ट्स में 2027 के लिए अनुमान को घटाकर 06 प्रतिशत भी किया गया है।
तीसरी अर्थव्यवस्था: भारत के 2028-2029 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की संभावना है। भारत की मज़बूती के प्रमुख कारण विदेशी मुद्रा भंडार है। भारत का विशाल विदेशी मुद्रा भंडार वैश्विक अनिश्चितता के समय मुद्रा स्थिरता को बनाए रखने में मदद करता है।
नीतिगत स्थिरता: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की स्पष्ट मौद्रिक नीति और महंगाई पर नियंत्रण ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। घरेलू मांग: भारत की विकास दर बाहरी कारकों के बजाय मज़बूत घरेलू मांग और खपत से संचालित हो रही है। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर: देश में हो रहे भारी निवेश और डिजिटल बुनियादी ढांचे ने विकास को गति दी है। वैश्विक तनाव: पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और भू-राजनीतिक तनाव ऊर्जा आपूर्ति और आयात लागत को प्रभावित कर सकते हैं। निजी निवेश: रिपोर्ट के अनुसार, निजी क्षेत्र अभी भी बड़े पैमाने पर नया निवेश करने में कुछ संकोच दिखा रहे हैं।
निष्कर्ष: मूडीज के अनुसार, भारत अपनी आंतरिक ताकत, बेहतर नीतिगत ढांचे और डिजिटल सुधारों के कारण एक ग्लोबल इकोनॉमिक पावर बनने की राह पर है।





























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