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भीषण ‘लू’: मस्तिष्क और सिर को ढकना क्यों है जीवन रक्षा का पहला नियम?

मई और जून की तपती दोपहरी में जब गर्म और खुश्क हवाएं (लू) चलती हैं, तो उनका सबसे पहला और घातक प्रहार हमारे सिर (मस्तिष्क) पर होता है। प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार, हमारा सिर ‘अग्नि तत्व’ और 72 हजार नाड़ियों का केंद्र है। जब इस पर सीधी तेज धूप पड़ती है, तो मस्तिष्क का तापमान (Core Temperature) अचानक बढ़ जाता है। इसे मेडिकल भाषा में ‘हाइपरथर्मिया’ (Hyperthermia) कहते हैं। इस स्थिति में दिमाग काम करना बंद कर देता है, इंसान को चक्कर आते हैं और वह बेहोश हो सकता है।

सूती कपड़े का ‘कूलिंग कवच’

जब भी तेज धूप में बाहर निकलें, तो सिर, गर्दन के पिछले हिस्से और कानों को सफेद या हल्के रंग के सूती कपड़े (गमछे) से जरूर ढकें। सूती कपड़ा सूर्य की खतरनाक अल्ट्रावायलेट (UV) किरणों को रिफ्लेक्ट (वापस फेंक) देता है और पसीने को सोखकर सिर के चारों ओर एक ‘माइक्रो-क्लाइमेट’ (ठंडा वातावरण) बनाता है। इससे मस्तिष्क की नसें सुरक्षित रहती हैं।

मेरी राय में 

प्रकृति के रौद्र रूप का सामना समझदारी से करें। अपने शरीर के कंट्रोल रूम (मस्तिष्क) को सीधी धूप से बचाएं। सूती कपड़े और प्याज का यह साधारण सा प्राकृतिक उपाय आपकी ‘जीवनी शक्ति’ को भीषण गर्मी में भी निढाल नहीं होने देगा।

कार्यकारी संपादक,  बृजपाल सिंह चौहान (एन. डी.) नेचुरोपैथी

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