नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को तीन जजों की खंडपीठ को भेज दिया है। खंडपीठ तय करेगी कि याचिकाओं को संविधान पीठ को भेजा जाए या नहीं। मामले में 11 अक्टूबर को अगली सुनवाई होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस एक्ट को लेकर काशी और मथुरा की अदालतों में सुनवाई जारी रहेगी। याचिकाकर्ता ने कहा था कि काशी और मथुरा में अदालतें अपने-अपने विचार से $कानून की व्याख्या कर रही हैं। सीजेआइ यू.यू. ललित ने कहा कि काशी और मथुरा में कार्रवाई पर रोक नहीं लगा सकते। याचिकाओं के मामले पर सीजेआइ ललित की बेंच ने सुनवाई की।
कोर्ट को बताया गया कि मामले में तीन पीआइएल व 15 हस्तक्षेप याचिकाएं दाख़्िाल की गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं पर केंद्र को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में हलफनामा दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि मार्च 2021 में दो जजों की बेंच ने केंद्र को नोटिस जारी किया था, लेकिन केंद्र ने जवाब दाख़्िाल नहीं किया। याचिकाओं में प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट को संविधान के मूल ढांचे के ख़्िाला$फ बताया गया है।
पूजा स्थल अधिनियम 1991 में 15 अगस्त 1947 तक अस्तित्व में आए किसी भी पूजास्थल को एक से दूसरे धर्म में परिवर्तित करने व किसी स्मारक के धार्मिक आधार पर रख-रखाव पर रोक का प्रावधान है। यह केंद्रीय $कानून 18 सितंबर 1991 को पारित किया गया था। अयोध्या मामला इससे बाहर था, क्योंकि उस पर विवाद पहले से चल रहा था।




























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