संकल्प शक्ति। चैत्र नवरात्र का पावन पर्व दिनांक 19 अप्रैल से प्रारम्भ हुआ और प्रारम्भ तिथि के साथ ही देश-प्रदेश में चहुंओर मातेश्वरी के मंदिरों में भक्तों की भीड़ जुटने लगी, जबकि मध्यप्रदेश के शहडोल ज़िले मे ब्यौहारी अनुविभाग अन्तर्गत सिद्धाश्रम सरिता के तट पर स्थित दिव्य चेतनास्थली पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम धाम में तो जैसे भक्तों का प्रवाह सा उमड़ पड़ा था।
नवरात्र का प्रथम और गुरुवार का अतिमहत्त्वपूर्ण दिवस, श्री दुर्गाचालीसा पाठ की ध्वनि लहरियों से सिद्धाश्रम धाम का वातावरण अन्य दिनों की अपेक्षा और भी मनोरम हो उठा था। प्रात: साढ़े चार बजे श्रद्धालुजनों ने माता भगवती आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा के मूलध्वज साधना मंदिर में पूजनीया शक्तिमयी माता जी के करकमलों से सम्पन्न आरती व साधनाक्रमों में भाग लेने के पश्चात् श्री दुगार्चालीसा अखण्ड पाठ मंदिर में चल रहे ‘माँ’ के गुणगान में शामिल होकर, प्रात: 06:30 बजे परम् पूज्य गुरुवरश्री के द्वारा की जा रही माता भगवती और सहायक शक्तियों की दिव्य छवियों की दिव्य आरती का चेतनात्मक लाभ प्राप्त किया। उसके बाद 07 बजे गुरुवरश्री ने मूलध्वज साधना मंदिर में ध्वजारोहण के पश्चात् पूजन-अर्चना का क्रम सम्पन्न किया और मंदिर के मुख्य घंटे पर जनकल्याण की कामना लेकर ‘माँ’ की चुनरी बांधी। आरतीक्रम के उपरान्त भक्तों ने प्रणाम भवन में क्रमबद्ध रूप से आपश्री के चरणों को नमन करते हुये आशीर्वाद प्राप्त किया।
श्रद्धालुजनों के द्वारा नवरात्र के प्रारम्भ दिवस 19 मार्च से समापन दिवस 27 मार्च तक विशेष अनुष्ठान के रूप में मूलध्वज की परिक्रमा, प्रात: व सायंकाल माता भगवती की आरती, श्री दुगार्चालीसा पाठ और गुरुवरश्री से आशीर्वाद प्राप्त करने का क्रम नित्यप्रति की तरह चलता रहा। पंचमी तिथि को मूलध्वज साधना मंदिर में योगभारती पद्धति से सामूहिक विवाह का कार्यक्रम भी सम्पन्न किया गया।
इस पावन पर्व पर सिद्धाश्रम धाम पहुंचे भक्तों व सिद्धाश्रमवासियों का भक्तिभाव चरम पर पहुंच चुका था। इस ग्रीष्म ऋतु में भी ठंडक लिये पवन पुरवाई, भक्तों को अतिआनन्द प्रदान करने वाली थी। चहुंओर ‘माँ’मय वातावरण, ‘माँ’और गुरुवरश्री के जयकारों व शंखनाद की प्रतिध्वनि, सम्पूर्ण वातावरण में गूंजती रही। भक्ति का ऐसा अनुपम प्रवाह न तो कहीं देखा गया और न सुना गया। सद्गुरुदेव जी महाराज जहां अपने शिष्यों व समाज के कल्याण हेतु अधिकांश समय साधना-अनुष्ठानों में लीन रहे, वहीं हज़ारों नए भक्तों ने इस शक्ति आराधना के पर्व पर नशामुक्त, मांसाहारमुक्त, चरित्रवान् जीवन जीने तथा मानवता की सेवा, धर्मरक्षा एवं राष्ट्ररक्षा करने का दृढ़ संकल्प लिया।
इस पावन अवसर पर…
चैत्र नवरात्र पर्व पर जहाँ एक ओर मूलध्वज साधना मंदिर में ‘माँ’-गुरुवरश्री की आरती, परिक्रमा, साधनाक्रम व अनन्तकाल के लिए चल रहे श्री दुगार्चालीसा अखण्ड पाठ के प्रवाह से यह पर्व भक्तिभाव से परिपूर्ण हो उठा था, वहीं दूसरी ओर पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम पहुंचने वाले सभी भक्तों के लिये नित्यप्रति की तरह सुबह-शाम ‘माँ’ अन्नपूर्णा भंडारा चलता रहा तथा ठहरने की भी हमेशा की तरह नि:शुल्क व्यवस्था रही। व्रत रहने वालों के लिये प्रात: गन्ने का जूस व दही और छाछ की व्यवस्था रही।
स्वामी जी की समाधि पर पहुंचे
इस पावन अवसर पर पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम पहुंचने वाले सभी श्रद्धालुजन गुरुवरश्री के पिताश्री पूज्य दण्डी संन्यासी स्वामी श्री रामप्रसाद आश्रम जी महाराज की समाधि स्थल पर भी पहुंचे और सभी ने वहां क्रमबद्ध रूप से स्वामी जी की समाधि को नमन कर परिक्रमा की तथा वहीं पर स्थित दानवीर बाबा के गुफास्थल पर भी जाकर शांतिलाभ प्राप्त किया।
त्रिशक्ति गोशाला में…
आश्रम पहुंचे अधिकांश श्रद्धालुजन, गऊ माताओं का दर्शन करने त्रिशक्ति गौशाला भी गये। ज्ञातव्य है कि 29 वर्ष पूर्व जब परम पूज्य गुरुवरश्री इस अंधियारी नामक स्थान पर पहुंचे थे, उस समय उनके साथ एक गाय भी थी और आज जहाँ अंधियारी क्षेत्र प्रकाशमय हो चुका है, वहीं गाय-बछड़ों की संख्या सैकड़ों में पहुंच गई है और गोशाला क्षेत्र विशाल व व्यवस्थित रूप ले चुका है। गायों की सेवा करने के लिये वहाँ अनेक गोसेवक नियुक्त हैं, जो नि:स्वार्थ भाव से उनकी सेवा का पूर्णतया लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
सामूहिक योगभारती विवाह कार्यक्रम
चैत्र नवरात्र पर्व की पंचमी तिथि पर परम पूज्य गुरुवरश्री के आशीर्वाद से मूलध्वज साधना मंदिर में योगभारती विवाह पद्धति से विधि-विधान के साथ दहेजमुक्त वैवाहिक कार्यक्रम सम्पन्न कराया गया। इसमें छ: नवयुगलों ने अपने परिजनों की सहमति से विवाह बन्धन में बंधकर आजीवन साथ निभाने का वचन एक-दूसरे को दिया।
विवाह के क्रम में सभी नवयुगलों ने सर्वप्रथम दाहिने हाथ में संकल्प सामग्री लेकर माता भगवती, परम पूज्य गुरुवरश्री एवं उपस्थित जनसमुदाय को साक्षी मानकर एक-दूसरे को पति-पत्नी के रूप में वरण किया। तत्पश्चात्, एक-दूसरे को माल्यार्पण करते हुये सभी ने गठबन्धन, मंगलसूत्र एवं सिन्दूर समर्पण की रस्में पूर्ण की। तदुपरान्त नवयुगलों ने पृथ्वी, जल, अग्नि, आकाश, वायु तत्त्व एवं दृश्य तथा अदृश्य जगत् की स्थापित समस्त शक्तियों को साक्षी मानकर सात फेरे लगाए और आजीवन साथ निभाने का संकल्प लिया। यह वैवाहिक कार्यक्रम शक्तिस्वरूपा बहनों की उपस्थिति में समारोहपूर्वक सम्पन्न हुआ और उन्होंने विवाहोपरान्त सभी नवयुगलों को उपहार भी भेंट किए।
विवाह सम्पन्न होने के बाद आरतीक्रम का लाभ लेकर सभी नवयुगलों ने परम पूज्य गुरुवरश्री का चरणवन्दन करके सुखद दाम्पत्य जीवन का आशीर्वाद प्राप्त किया।
जिन नवयुगलों का शुभ विवाह सम्पन्न हुआ, उनके नाम इस प्रकार से हैं- मनोज कुमार टांडिया संग कुसुम संत, बलराम गुप्ता संग योगिता गुप्ता, कुंजमणि पटेल संग प्रभा पटेल, देवशरण राजपूत संग अभिलाषा राजपूत, मनीष कुमार तिवारी संग वैष्णवी शुक्ला और चंदन कटियार संग प्रियंका पटेल।





























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