बरगवां, सिंगरौली। चैत्र नवरात्र के पावन पर्व पर दिनांक 21-22 मार्च को भगवती मानव कल्याण संगठन एवं पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम ट्रस्ट के संयुक्त तत्त्वावधान में ग्राम-बड़ोखर, तहसील-बरगवां, ज़िला-सिंगरौली में 24 घंटे का श्री दुर्गाचालीसा अखण्ड पाठ सम्पन्न किया गया।
इस अवसर पर भगवती मानव कल्याण संगठन के केन्द्रीय मुख्य सचिव सिद्धाश्रमरत्न आशीष शुक्ला (राजू भइया) जी ने प्रभावपूर्ण शब्दों में उपस्थित जनसमुदाय को सम्बोधित करते हुए कहा कि ‘‘परम पूज्य सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के द्वारा इस विशेष यात्रा के माध्यम से युग परिवर्तन की नीव स्थापित की गई है। परम पूज्य गुरुवरश्री ने अपने शिष्यों को सत्यधर्म के पथ पर बढ़ाते हुए लाखों शक्तिसाधक तैयार किए हैं और इस बड़ोखर ग्राम के लोग सौभाग्यशाली हैं कि गुरुदेव जी ने यहाँ श्री दुर्गाचालीसा अखंड पाठ के रूप में अपना आशीर्वाद प्रदान किया।
समर्पण स्तुति के माध्यम से और ‘माँ’-गुरुवर के श्रीचरणों में निवेदन करते हुए हमने साधनाक्रम को सम्पन्न किया कि ‘अब सौंप दिया इस जीवन का सब भार तुम्हारे हाथों में, मेरे सब गुण-दोष समर्पित हों भगवती तुम्हारे चरणों में’ और हम यह भी निवेदन करते हैं कि जीवन की एक-एक रग का तार ‘माँ’ के चरणों में पहुंचे, हमारे जीवन का लेखा-जोखा भी ‘माँ’ के चरणों में पहुंचे। गुरुदेव जी ने कहा है कि ‘आप धर्म के पथ पर चलते हैं या अधर्म के पथ पर चलते हैं, आपके अन्दर आत्मारूपी सुपर कम्प्यूटर विद्यमान है, जो आपके सभी कर्मों का लेखा-जोखा रखता है और उसी के आधार पर हमारे जीवन की दशा और दिशा का निर्धारण होता है।’
हमने, आपने तो धर्म के मार्ग का चयन किया है और हमें घर-घर को नशामुक्त बनाना है, घर-घर में ‘माँ’ की साधना प्रारम्भ करानी है, हर घर में ‘माँ’ का ध्वज लगा हो, यह लक्ष्य लेकर चलना है। भाइयों-बहनों, जिस दिन हम गुरुदेव जी के द्वारा बताए गए लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ जाएंगे, तो विश्वास मानिए कि वह दिन दूर नहीं है, जब हमारा पूरा मध्यप्रदेश नशामुक्त घोषित होगा और हमारा पूरा भारत देश नशामुक्त घोषित होगा।’’
भारतीय शक्ति चेतना पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष शक्तिस्वरूपा बहन सिद्धाश्रमरत्न संध्या शुक्ला जी ने सारगर्भित शब्दों में कहा कि ‘‘हमारा सौभाग्य है कि हम सनातनधर्म को मानने वाले लोग हैं और हमारा जन्म भारतभूमि में हुआ है, जो ऋषियों-मुनियों की धरती है और जहाँ वेद-पुराणों-उपनिषदों ने समाज को एक दिशाधारा प्रदान की, समाज को धर्म का पालन करने का ज्ञान प्रदान किया। लाखों-लाख साधु-संत-संन्यासियों ने इसी धरा पर साधना करके परमतत्त्व को प्राप्त किया और वही मार्ग हमको प्रदान कर चले गए।
परम पूज्य सद्गरुदेव जी महाराज ने हमें धर्मरक्षा, राष्ट्ररक्षा और मानवता की सेवा करने का मार्ग दिया है और इन कर्त्तव्यों का निर्वहन हम तभी कर सकते हैं, जब अपने जीवन में परिवर्तन लाएंगे। दूसरों के भरोसे मत बैठे रहो कि कोई सरकार आपके जीवन में परिवर्तन लाएगी, कोई महान व्यक्ति आएगा और आपके जीवन में परिवर्तन लाएगा, अपितु स्वयं अपने जीवन में परिवर्तन लाना पड़ेगा।
जब आप सुधरेंगे, तब समाज सुधरेगा, जब समाज सुधरेगा, तब देश सुधरेगा और जब देश सुधरेगा, तब मानवता की रक्षा हो सकेगी। इसीलिए परम पूज्य गुरुवर ने कहा है कि ‘यदि धर्म का पालन करना चाहते हो, तो अपने अन्दर से जातिभेद, छुआछूत जैसी निकृष्ट भावना को पूरी तरह मिटा दो। मुझमें वही अंश है, तुममें भी वही अंश है और वह अंश प्रकृतिसत्ता का अंश है। इसमें अंशमात्र भी संशय नहीं, तो फिर एक-दूसरे में अंतर कैसा? व्यक्ति-व्यक्ति में भेद करना बन्द करो, मानव हो, मानव बनकर रहो। सब कोई एकजुट हो करके प्रेम बांटने का प्रयास करो, एकसूत्र में बंधने का प्रयास करो, स्वर्णिम जीवन तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा है।’
गुरुवरश्री के चिन्तनों को शिरोधार्य करो। आपका भविष्य आपके हाथ में है और यदि आज संकल्प ले लोगे कि मुझे अनीति-अन्याय-अधर्म के पथ पर नहीं चलना है, मुझे अपने जीवन को सत्यधर्म के मार्ग पर बढ़ाना है, मुझे अपने जीवन को परोपकार के मार्ग पर बढ़ाना है, तो फिर देखो कि आने वाला समय कितना अच्छा होगा?
‘माँ’-गुरुवर के चरणों में मेरी यही प्रार्थना है कि आप सभी का जीवन खुशियों से भरा रहे, सुख-शांति-समृद्धि आपके जीवन में बढ़ती चली जाए, हमारा और आपका साथ हमेशा बना रहे और युग परिवर्तन की इस यात्रा में हमारे क़दम बढ़ते रहें।’’




























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