हर वर्ष 15 मार्च को पूरी दुनिया में ‘विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस’ मनाया जाता है। यह दिन उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के प्रति सचेत करने, बाज़ार में होने वाली धोखाधड़ी से बचाने का अवसर है। वर्ष 2026 के लिए इस दिवस का मुख्य विषय ‘सुरक्षित उत्पाद, आश्वस्त उपभोक्ता’ रखा गया है, जो बाज़ार में बिकने वाले हर सामान की गुणवत्ता और सुरक्षा पर जोर देता है।
कब से हुई शुरुआत?
इस दिवस की शुरुआत 15 मार्च, 1983 को हुई थी। यह तारीख अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी के 15 मार्च, 1962 को अमेरिकी कांग्रेस में दिए गए उस ऐतिहासिक भाषण की याद में चुनी गई, जिसमें उन्होंने पहली बार औपचारिक रूप से ‘उपभोक्ता अधिकारों’ की व्याख्या की थी। उन्होंने स्पष्ट किया था कि उपभोक्ता अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा समूह है, लेकिन अक्सर उसकी आवाज़ अनसुनी रह जाती है।
जागो ग्राहक जागो
भारत में उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019’ लागू है, जिसने 1986 के पुराने क़ानून की जगह ली है। डिजिटल युग और ई-कॉमर्स की चुनौतियों को देखते हुए नए क़ानून में कई कड़े प्रावधान किए गए हैं:
ई-कॉमर्स का समावेश: अब ऑनलाइन खरीददारी करने वाले ग्राहक भी इस क़ानून के दायरे में हैं।
सीसीपीए का गठन: भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार प्रथाओं को रोकने के लिए ‘केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण’ की स्थापना की गई है।
उत्पाद की ज़िम्मेदारी: यदि किसी दोषपूर्ण उत्पाद या खराब सेवा से उपभोक्ता को नुक़सान होता है, तो निर्माता या विक्रेता को क्षतिपूर्ति देनी होगी।
क़ानून के अनुसार, प्रत्येक उपभोक्ता के पास छह बुनियादी अधिकार हैं-–
सुरक्षा का अधिकार: जीवन और संपत्ति के लिए ख़तरनाक वस्तुओं से सुरक्षा।
सूचना का अधिकार: उत्पाद की गुणवत्ता, मात्रा, शुद्धता और कीमत जानना।
चयन का अधिकार: प्रतिस्पर्धी कीमतों पर विभिन्न विकल्पों में से चुनने की स्वतंत्रता।
सुनवाई का अधिकार: उपभोक्ता की शिकायतों को उचित मंच पर सुना जाना।
निवारण का अधिकार: अनुचित व्यापार प्रथाओं के ख़िलाफ़ हर्जाना पाने का अधिकार।
उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार: ज़गरूक होने के लिए आवश्यक ज्ञान प्राप्त करना।
अधिकारों के साथ-साथ उपभोक्ताओं के कुछ कर्तव्य भी हैं, जिनका पालने करके वे ठगी से बच सकते हैं–
खरीददारी करते समय हमेशा पक्का बिल लें। सामान की गुणवत्ता मानकों की जांच करें। विज्ञापनों के लुभावने वादों में आने के बजाय उत्पाद की असलियत परखें। शिकायत होने पर चुप न बैठें, उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाएं।




























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