अगर आपके ब्लड में कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ता ही जा रहा है, तो आपको अपने खानपान पर विशेष ध्यान देने की ज़रूरत है। ये वसा नसों में ब्लॉकेज का का कारण बनती है और इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का ख़्ातरा पैदा होता है। सूजी हुई सख्त नसों में आयुर्वेदिक चीजें अच्छा असर दिखाती हैं।
मोरिंगा यानी सहजन की पत्तियों को चबायें
आयुर्वेद में सहजन एक नहीं कई बीमारियों की औषधि मानी गई है, इसकी पत्तियों से लेकर छाल और डंठल तक में मेडिसिन गुण होता है। ये बालों के झडऩे, हाई बीपी, गठिया, एनीमिया, थायराइड, डायबिटीज, अस्थमा, लंग्स डिजीज, किडनी डिजीज, वजन कम करने और कमज़ोर प्रतिरक्षा प्रणाली जैसी कई गंभीर बीमारियों में दवा की तरह काम करती है.
नसों मे जमी वसा को पिघलाये
मोरिंगा की पत्तियों की नर्म और ताजी पत्तियों को आप नित्यप्रति चबाकर उसका रस लें। आप चाहें तो इन्हें स्प्राउट्स या सलाद में डालकर कच्चा खा लें, इससे ये ज़्यादा असर करेंगी। आप चाहें तो इसका साग या पराठा बनाकर भी खा सकते हैं या पानी में उबाल कर इसके पानी को चाय की तरह सेवन कर सकते हैं। पाउडर के रूप में भी इसे बनाकर रख सकते हैं और रोज कम से कम 05 चम्मच इसका सेवन करें.
सहजन के और भी हैं अनेक फायदे
यह हीमोग्लोबिन को बेहतर बनाने में मदद करता है, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है, लीवर और किडनी को डिटॉक्सीफाई करता है, रक्त शुद्ध करता है, चर्म रोगों को दूर करता है और वजन घटाने में मदद करता है, शुगर लेवल को नियंत्रित रखता है।
तनाव, चिंता और मिजाज को कम करता है, थायराइड फंक्शन में सुधार करता है, चयापचय में सुधार करता है और नर्सिंग माताओं में स्तन के दूध के उत्पादन को बढ़ाता है
साइड इफेक्ट्स
सहजन गर्म प्रकृति का होता है, इसलिए गर्मी की समस्या (एसिडिटी, ब्लीडिंग, पाइल्स, भारी मासिक धर्म, मुंहासे) से पीडि़त लोगों को गर्मियों में इससे बचना चाहिए या सावधानी के साथ इसका सेवन करना चाहिए। सर्दियों में पित्त वाले लोग भी बिना किसी चिंता के खा सकते हैं.





























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