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नशा न केवल हमारे शरीर को नष्ट करता है, बल्कि सोचने-समझने की शक्ति भी छीन लेता है: सौरभ द्विवेदी

शिमला। समाज में नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना और नशामुक्ति के संकल्प के साथ हिमाचल प्रदेश के शिमला ज़िले में एक भव्य धार्मिक एवं सामाजिक चेतना कार्यक्रम का आयोजन किया गया। दिनांक 5-6 जून 2026 को ग्राम ननखरी (नालावन) में आयोजित इस दो दिवसीय दिव्य अनुष्ठान ने स्थानीय ग्रामीणों में भक्ति और समाज सुधार की एक नई अलख जगाई।  

कार्यक्रम के प्रथम दिवस, दिनांक 05 जून को, आयोजन स्थल से ‘नशामुक्ति जनजागरण सद्भावना यात्रा’ निकाली गई। इस यात्रा का नेतृत्व भगवती मानव कल्याण संगठन के केंद्रीय महासचिव एवं सिद्धाश्रमरत्न सौरभ द्विवेदी जी ने किया। सद्भावना यात्रा के दौरान सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के शिष्यों-भक्तों और बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामवासियों ने पूरे गांव का भ्रमण किया। यात्रा में शामिल लोग नशामुक्ति और सामाजिक समरसता के नारे लगा रहे थे। पूरे गांव की परिक्रमा करने के बाद, सभी श्रद्धालु वापस मुख्य कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे और वहां चल रहे दिव्य श्री दुर्गाचालीसा अखंड पाठ अनुष्ठान में सम्मिलित होगए।    

कार्यक्रम के  द्वितीय दिवस, दिनांक 06 जून को कार्यक्रम के समापन अवसर पर सिद्धाश्रमरत्न सौरभ द्विवेदी जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि ‘‘ मध्यप्रदेश के शहडोल ज़िले में स्थित पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम धाम एक ऐसा पावन स्थल है, जहाँ मानवता के कल्याणार्थ 30 वर्षों से श्री दुर्गाचालीसा का अखण्ड पाठ चल रहा है और वहां ऋषिवर सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज नित्यप्रति शिष्यों-भक्तों को अपने आशीर्वाद से परिपूरित करते हैं। माता आदिशक्ति जगत् जननी की कृपा और गुरुवरश्री के आशीर्वाद से करोड़ों लोग नशे-मांसाहार से मुक्त होकर साधनापथ पर चलते हुए सानन्द कर्ममय जीवन व्यतीत कर रहे हैं। 

हिमांचल प्रदेश के ज़िला शिमला के इस गांव में, जहाँ प्राकृतिक सौन्दर्य विखरा पड़ा है और आज मैं इस देवभूमि में नशामुक्त जीवन एवं अध्यात्म  साधना पर कुछ कहना चाहता हूँ।  आज हमारी युवा पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत को भूलकर नशे के अंधकार में भटक रही है। नशा न केवल हमारे शरीर को नष्ट करता है, बल्कि सोचने-समझने की शक्ति भी छीन लेता है और नशे से ग्रसित व्यक्ति तो कभी साधना के पथ पर बढ़ ही नहीं सकता।

यह हिमालय का क्षेत्र, जहाँ अनेक ऋषियों-मुनियों ने तपस्या कर अलौकिक शक्तियाँ अर्जित की हैं, क्योंकि यहाँ का वातावरण ऐसा है, जो शांत एवं पावन है। हमारे गुरुदेव जी तो हर घर को पावन बनाना चाहते हैं और उनका कहना है कि ‘तप-साधना के लिए हिमालय जाने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि नशे-मांसाहार से मुक्त होकर और चरित्रवान् जीवन अपनाकर अपने घर को ही शांतमय पावन पवित्र वातावरण में परिवर्तित कर दें, जहाँ नित्यप्रति ‘माँ’ की साधना-आराधना हो, ईश्वरीय गुणगान हो। अपने आपको, अपने घर को इतना पावन बना लो कि हिमालय जैसा शुद्ध वातावरण रहे।’ परम पूज्य गुरुवर का चिन्तन है कि ‘नशा-मांसाहार का त्याग किए बिना कोई भी ऊर्जावान नहीं बन सकता और न ही साधनापथ पर चल सकता है।’ 

आइए, आज इस मंच से हम सभी नशे-मांसाहार से मुक्त चरित्रवान् जीवन अपनाने का संकल्प लें और अध्यात्म साधना का पथ अपनाकर एक स्वस्थ, समृद्ध और नशामुक्त समाज का निर्माण करें।’’ उद्बोधनक्रम के पश्चात् कार्यक्रम में उपस्थित सभी भक्त महाप्रसाद ग्रहण करके कृत-कृत्य हुए।

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