झांसी/लखनऊ। बुंदेलखंड क्षेत्र, जो अपनी ऐतिहासिक वीरता और सूखे की समस्या के लिए जाना जाता है, अब भारत की आर्थिक और संसाधन सुरक्षा के केंद्र में उभर रहा है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के हालिया सर्वेक्षणों और कार्यशालाओं में यह स्पष्ट हुआ है कि इस क्षेत्र की गहराई में न केवल पारंपरिक पत्थर और बालू, बल्कि सोना, प्लैटिनम, हीरा और भविष्य के ‘सफेद सोने’ कहे जाने वाले लिथियम का विशाल भंडार मौजूद है।
ललितपुर (सोना और प्लैटिनम): ललितपुर के इकाउना और डांगली क्षेत्रों में प्लैटिनम ग्रुप एलिमेंट्स के साथ-साथ सोने के भंडार की पुष्टि हुई है। यहाँ प्रति टन अयस्क में प्लैटिनम की मात्रा तमिलनाडु और गोवा जैसे राज्यों से भी अधिक पाई गई है। बांदा (हीरा): बांदा ज़िले की बाधिन नदी के जलग्रहण क्षेत्र में हीरे के भंडार मिले हैं, जो मध्यप्रदेश के पन्ना और सतना बेल्ट के निकट स्थित हैं।
झांसी और महोबा (क्वार्ट्ज और सिलिका): इन ज़िलों में क्वार्ट्ज और सिलिका का प्रचुर भंडार है, जिनकी औद्योगिक मांग (विशेषकर लोहा, इस्पात और कांच उद्योग में) तेजी से बढ़ रही है।
चित्रकूट (पोटाश): चित्रकूट के सेमरी और रेवा चट्टानों में लगभग 05 करोड़ टन पोटाश (ग्लूकोनाइट सैंडस्टोन) मिलने का अनुमान है, जिसकी कीमत करीब 1500 करोड़ रुपये आंकी गई है।





























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