भोपाल। मध्यप्रदेश में 925 गांवों का नक्शा बदलने की तैयारी चल रही है। राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए इन गांवों की प्रशासनिक स्थिति में फेरबदल किया है। घने जंगलों में बसे इन गांवों को राजस्व ग्रामों में बदला जा रहा है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के अनुसार, इनमें से अधिकांश वन ग्रामों को तो राजस्व ग्राम में परिवर्तित कर भी दिया गया है। इसके लिए 06 माह का विशेष अभियान चलाया गया। वन ग्रामों से राजस्व ग्रामों में परिवर्तित हो जाने से केवल नक्शा ही नहीं बदलेगा, बल्कि गांवों की पूरी तस्वीर ही बदल जाएगी। इन गांवों में अब जमीनों का बंटवारा और नामांतरण हो सकेगा। इतना ही नहीं, यहां की फसलों की अब गिरदावरी भी हो सकेगी।
बताया गया कि वन ग्राम से राजस्व ग्राम में परिवर्तित होने से ग्रामीणों को बड़ी सहूलियत होगी। भू-अभिलेख और नक्शा का काम पूरा हो जाने के बाद यहां बिजली, पानी, सड़क आदि मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराई जा रहीं हैं। अस्पताल, आंगनवाड़ी और स्कूल भवन बनाए जाएंगे। प्राकृतिक आपदा की स्थिति में फसल बीमा योजना का लाभ भी मिलेगा। इन गांवों के राजस्व नक्शा बनाने का कार्य राजस्व विभाग तेजी से कर रहा है।
प्रदेश में सबसे ज्यादा बैतूल ज़िले के 91 गांवोें को राजस्व ग्राम बनाया गया है। इसके अलावा डिंडौरी के 86, मंडला के 75, खरगौन के 65, बड़वानी के 64, खंडवा के 51, सीहोर के 49, छिंदवाड़ा के 48, बालाघाट के 46, हरदा के 42, बुरहानपुर के 37, सिवनी के 28, नर्मदापुरम के 24 वन ग्राम अब राजस्व ग्राम बन गए हैं। भोपाल जिले के 14, धार के 13, देवास के 12, सिंगरौली के 11, नरसिंहपुर के 10, रायसेन के 7, टीकमगढ़ व जबलपुर के 5-5, सागर के 4, विदिशा, राजगढ़, इंदौर, कटनी तथा गुना के 1-1 गांव राजस्व ग्राम बना दिए गए हैं। शेष वन ग्रामों के वीरान होने, विस्थापित होने या डूब क्षेत्र में होने से इन्हें राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने की जरूरत नहीं रही है।





























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