लौकी सेहत के लिए बहुत उपयोगी सब्जी है। इस हरी सब्जी का सेवन लोग उसका जूस बनाकर, भुजिया बनाकर, दाल के साथ और सूप के रूप में करते हैं। लौकी पोषक तत्त्वों से भरपूर होती है और इसे सुपर फूड माना जाता है। इसमें विटामिन, खनिज और अन्य आवश्यक पोषक तत्त्व होते हैं, जो शरीर के लिए फायदेमंद हैं। कम कैलोरी और हाई फाइबर ये सब्जी वजन घटाने में मदद करती है और पाचन को बेहतर बनाती है। पोटैशियम और मैग्नीशियम से भरपूर इस सब्जी का सेवन करने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहता है और दिल के रोगों से बचाव होता है।
इसमें कैल्शियम और फॉस्फोरस भी मौजूद होता है, जो हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाता है। इसमें मौजूद आयरन और फोलेट एनीमिया से बचाव करता है और ब्लड सकुर्लेशन में सुधार करता है। विटामिन से भरपूर ये सब्जी इम्यूनिटी को मजबूत करती है और स्किन की हेल्थ में सुधार करती है। इसमें भरपूर पानी मौजूद है, जो बॉडी को हाइड्रेट रखता है और बॉडी को डिटॉक्स करता है।
आयुर्वेदिक एक्सपर्ट आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि जिनको पेट संबंधी परेशानी हैं गैस, कब्ज व अपच हैं वे लौकी को गर्म पानी से धोकर छिलके समेत उसका जूस निकालकर रोजाना सुबह खाली पेट उसका सेवन करें। ये जूस आंतों की कमजोरी को दूर करेगा और आंत की सेहत को दुरुस्त करेगा। पाचन तंत्र को मजबूत बनाने और आंत की कमजोरी को दूर करने में ये बहुत प्रभावी मानी जाती है।
पाचन को दुरुस्त करती है लौकी
विषय विशेषज्ञ कहते हैं कि लौकी का सेवन करने से आंत और पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है। लौकी में घुलनशील और अघुलनशील फाइबर मौजूद होता है, जो मल को सॉफ्ट बनाता है और कब्ज की समस्या दूर करता है। अगर रोजाना सुबह खाली पेट ताजी लौकी के जूस का सेवन किया जाए, तो यह आंतों की सफाई करता है और आंतों की कमजोरी का इलाज करता है। लौकी में 90% तक पानी होता है, जिससे शरीर हाइड्रेट रहता है और आंतों में नमी बनी रहती है। जिन लोगों की आंतें सूख गई हैं, आंतों में कमजोरी हो गई है, पेट में जलन और एसिडिटी रहती है ऐसे लोग रोजाना लौकी के जूस का सेवन करें। लौकी का रस पेट की जलन, एसिडिटी और अल्सर जैसी समस्याओं में राहत देता है।
पेट को पहुंचाता है ठंडक
यह पेट को ठंडक पहुंचाता है और पेट के बैक्टीरिया बैलेंस रखता है। लौकी एक ऐसी सब्जी है जो एंटीआॅक्सीडेंट्स और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होती है। इसका सेवन करने से आंतों में गुड बैक्टीरिया बढ़ते हैं। इससे आंतें मजबूत बनती हैं और पेट संबंधी समस्याएं कम होती हैं।



























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