नई दिल्ली। हेट स्पीच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को गंभीर टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा कि यह 21वीं सदी है, धर्म के नाम पर हम कहाँ पहुंच गए हैं? नफरत भरे भाषणों को लेकर दायर की गयी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अधिकारियों को ऐसे मामलों के ख़्िाला$फ ख़्ाुद कार्रवाई करने या अवमानना के आरोपों का सामना करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा, अगर अधिकारी कार्रवाई करने में विफल रहते हैं, तो अवमानना शुरू की जाएगी।
उच्चतम न्यायालय ने मुस्लिम समुदाय के ख़्िाला$फ नफरत फैलाने वाले भाषणों पर रोक लगाने के लिए उचित $कदम उठाये जाने के निर्देश दिए जाने की मांग कर रही याचिका पर बृहस्पतिवार को केंद्र और राज्यों से जवाब तलब किया था। न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति सीटी रवि कुमार की पीठ ने एक अन्य पीठ के समक्ष लंबित ऐसी ही याचिकाओं के साथ इसे भी नत्थी करते हुए केंद्र और सभी राज्यों को नोटिस जारी किए।
याचिकाकर्ता शाहीन अब्दुल्ला ने केंद्र और राज्य सरकारों को देशभर में नफरत फैलाने वाले अपराधों और भड़काऊ भाषणों की घटनाओं की स्वतंत्र, विश्वसनीय और निष्पक्ष जांच शुरू करने का निर्देश देने की मांग को लेकर शीर्ष अदालत का रुख किया है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने शुरुआत में दलील दी कि इस समस्या से निपटने के लिए कुछ किये जाने की ज़रूरत है। उन्होंने आगे कहा कि नफरत फैलाने वाले भाषण देने या ऐसे अपराधों में लिप्त लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।




























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