तपती गर्मी में जब दिमाग ‘ओवरहीट’ (Overheat) हो जाता है, तो छोटी-छोटी बातों पर भयंकर गुस्सा आता है और दिल की धड़कन तेज हो जाती है। हमारी रीढ़ की हड्डी (Spinal Cord) पूरे शरीर की नसों का ‘मेन हाइवे’ है, जो सीधे मस्तिष्क (Brain) से जुड़ी होती है। जब शरीर का तापमान बढ़ता है, तो इसी रीढ़ की हड्डी के तरल पदार्थ (Cerebrospinal fluid) में गर्मी भर जाती है।
प्राकृतिक चिकित्सा में इस भड़की हुई नसों की गर्मी को तुरंत बुझाने के लिए ‘मेरुदंड स्नान’ (Spinal Bath) का विधान है।
क्या है मेरुदंड स्नान का विज्ञान?
इस चिकित्सा में केवल रीढ़ की हड्डी को ठंडे पानी के संपर्क में रखा जाता है।
जब ठंडे पानी का स्पर्श रीढ़ की हड्डी पर होता है, तो वहां से निकलने वाली सारी तंत्रिकाएं (Nerves) तुरंत रिलैक्स (शांत) हो जाती हैं।
यह ठंडा प्रभाव सीधे ‘पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम’ (शांत करने वाली नसों) को एक्टिव कर देता है। 15 मिनट के इस स्नान से हाई ब्लड प्रेशर, भयंकर क्रोध, और मानसिक तनाव जादू की तरह गायब हो जाते हैं।
मेरी राय में: गुस्सा और तनाव कोई मानसिक बीमारी नहीं, बल्कि नसों में बढ़ी हुई गर्मी का परिणाम हैं। रसायनों (Pills) से दिमाग को सुन्न न करें। जल के इस शीतल स्पर्श को अपनी रीढ़ पर महसूस करें। एक शांत रीढ़ ही एक स्थिर और शक्तिशाली ‘संकल्प’ को जन्म देती है।
दादी माँ का अचूक प्राकृतिक नुस्खा
घर पर मेरुदंड स्नान (गीला तौलिया विधि): यदि आपके पास प्राकृतिक चिकित्सा वाला विशेष टब नहीं है, तो एक सूती तौलिया लें और उसे मटके के ठंडे पानी में भिगोकर हल्का निचोड़ लें। पेट के बल लेट जाएं और इस ठंडे गीले तौलिए को अपनी गर्दन के निचले हिस्से से लेकर रीढ़ की हड्डी के अंत (Tailbone) तक बिछा लें। 15 मिनट तक आंखें बंद करके लेटें। जैसे-जैसे तौलिया आपकी रीढ़ की गर्मी सोखेगा, आपका दिमाग एक गहरी और असीम शांति से भर जाएगा।
कार्यकारी संपादक, बृजपाल सिंह चौहान (एन. डी.) नेचुरोपैथी
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