हिंदी और उर्दू साहित्य के अनमोल रत्न, ‘उपन्यास सम्राट’ और ‘कथा सम्राट’ कहे जाने वाले मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती 31 जुलाई को है। वाराणसी के पास लमही गांव में जन्मे धनपत राय (प्रेमचंद) ने अपनी जादुई कलम से आम आदमी, किसान, मजदूर, महिलाओं और समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति की पीड़ा को जो जुबान दी, उसकी गूंज आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।
प्रेमचंद से पहले का हिंदी साहित्य राजा-रानियों, परियों, जादुई तिलिस्म और काल्पनिक ऐश्वर्य की कहानियों में सिमटा हुआ था। प्रेमचंद जी ने इस परंपरा को पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने साहित्य को कल्पना के लोक से निकालकर भारत के गांवों और ग़रीब किसानों की झोपड़ियों तक पहुंचाया। उनकी रचनाओं में ग्रामीण जीवन का जो जीवंत और यथार्थवादी चित्रण मिलता है, वह अन्यत्र दुर्लभ है।
सामाजिक कुरीतियों पर करारी चोट: उन्होंने जातिवाद, छुआछूत, दहेज प्रथा, अनमेल विवाह, कर्ज के जाल में फंसे किसानों की लाचारी और जमींदारों व साहूकारों के शोषण को अपनी कहानियों और उपन्यासों का मुख्य विषय बनाया। अमर पात्रों का संसार: प्रेमचंद जी की कलम ने हिंदी साहित्य को ऐसे अमर पात्र दिए हैं जो आज भी हमारे समाज के किसी-न-किसी कोने में जीवित नज़र आते हैं।
होरी और धनिया (गोदान): भारतीय किसान की लाचारी, मर्यादा और जीवन भर के संघर्ष की सबसे जीवंत और दु:खद दास्तान। हामिद (ईदगाह): मात्र चार-पाँच साल का एक छोटा बच्चा, जो अपनी खुशियों को मारकर अपनी दादी के लिए चिमटा खरीदता है। यह कहानी बाल मनोविज्ञान और संवेदनशीलता की पराकाष्ठा है। हल्कू (पूस की रात): ठंड से ठिठुरता एक ग़रीब किसान, जो फसल नष्ट होने पर भी कर्ज के जाल से मुक्ति की राहत महसूस करता है।
प्रेमचंद के विचार: आज हम जिस आधुनिक और डिजिटल युग में जी रहे हैं, वहां भी प्रेमचंद जी के विचार और उनकी रचनाएं प्रासंगिक हैं। चाहे किसानों की समस्याएं हों, महिलाओं के अधिकार हों या फिर समाज में बढ़ती आर्थिक असमानता—प्रेमचंद जी इन सब पर एक सदी पहले ही विस्तार से लिख दिया था। उन्होंने केवल कहानियां नहीं लिखीं, बल्कि समाज को आईना दिखाया और सुधरने का मार्ग भी सुझाया।
सच्ची श्रद्धांजलि: 31 जुलाई को उनकी जयंती मनाना केवल एक रस्म नहीं होनी चाहिए, बल्कि उनके लिखे ‘कफन’, ‘गबन’ और ‘रंगभूमि’ जैसे साहित्यों को पढ़कर समाज में समानता और संवेदनशीलता की भावना जगाना ही इस महान लेखक को हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।





























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