रीवा। रीवा लोकायुक्त विशेष न्यायालय ने भ्रष्टाचार के आरोपी एक चिकित्सक को तीन वर्ष का सश्रम कारावास व पाँच हज़ार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है। बताया गया कि आरोपी डॉक्टर ने मेडिको लीगल केस बनाने के एवज में 500 रुपए की रिश्वत मांगी थी, जिसकी शिकायत पीडि़त ने वर्ष 2017 में लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक के पास की थी। आवेदन सही पाए जाने पर छापामार कार्रवाई की गई, तब चिकित्सक को लोकायुक्त ने रंगेहाथ पकड़ा था।
मिली जानकारी के मुताबिक डॉ. वीके गर्ग तत्कालीन चिकित्सा अधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रायपुर कर्चुलियान को लोकायुक्त विशेष न्यायालय ने भ्रष्टाचार के प्रकरण में 02 मई को पारित निर्णय में दोषी पाया है। कहते है कि 06 वर्ष पहले शिकायतकर्ता रामयश तिवारी ने लोकायुक्त पुलिस के पास शिकायत की थी।
फरियादी ने बताया था कि शिवेंद्र वर्मा के लड़के का हाथ टूट गया है। उसकी एमएलसी बनाने के एवज में चिकित्सक 500 रुपए की रिश्वत मांगी रहा है। रकम न देने पर परेशान कर रहा है। खुद के साथ हो रहे भ्रष्टाचार को देखकर फरियादी लोकायुक्त कार्यालय गया, तब रंगे हाथ ट्रेप कर अपराध क्रमांक 74/17 पंजीबद्ध कर विवेचना की गई।
डॉ. वीके गर्ग के मामले में लोकायुक्त विशेष न्यायालय ने 05 वर्ष बाद 15 मार्च 2022 को चालान प्रस्तुत किया गया था। विशेष न्यायालय रीवा द्वारा विचारण उपरांत 02 मई को निर्णय सुनाया। जिसमे 03 वर्ष का सश्रम कारावास व 5,000 रुपए के अर्थदंड की सजा दी गई है।





























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