नई दिल्ली। देश में बुलेट ट्रेन चलाने की परियोजना ने गति पकड़ ली है। 320 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से दौडऩे वाली यह ट्रेन 2027 तक अपने ट्रैक पर आ जाएगी। बुलेट ट्रेन को इतनी तेज गति से चलाने के लिए ट्रैक की मज़बूती पर ध्यान दिया जा रहा है।
विदित हो कि एक हज़ार इंजीनियर एवं वर्क लीडरों को ट्रैक निर्माण की तकनीक बताई जा रही है। इसके लिए सूरत डिपो में विशेष तौर पर तीन ट्रेल लाइन का निर्माण किया गया है। जापानी विशेषज्ञ उन्हें प्रशिक्षित कर रहे हैं। जापान के आर्थिक सहयोग से एक लाख आठ हज़ार करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट में गुजरात के आठ जि़लों एवं दादरा नगर हवेली में आने वाले 352 किलोमीटर लंबे इस रूट के निर्माण का काम तेज गति से चल रहा है। इस रूट पर स्टेशनों, पुलों एवं ट्रैक निर्माण के काम को दो वर्षों के भीतर पूरा किया जाना है।
भारतीय इंजीनियर हो रहे हैं प्रशिक्षित
बताया गया कि इतनी बड़ी संख्या में भारतीय इंजीनियरों एवं तकनीशियनों को इसलिए प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि भारत के अगले प्रोजेक्ट में भी इनके कौशल का इस्तेमाल किया जा सके।
ट्रैक निर्माण काम में प्रशिक्षित एवं प्रमाणित इंजीनियर एवं वर्क लीडर ही लगाए जाएंगे। इससे हाईस्पीड रेल ट्रैक सिस्टम की जापानी तकनीक को अपनाने में भी मदद मिलेगी। फिलहाल मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल कारिडोर के टी-2 पैकेज के लिए यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें वापी और वडोदरा के बीच 237 किलोमीटर की दूरी शामिल है।





























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