प्रयागराज। नशे-मांसाहार से मुक्त, चरित्रवान्, चेतनावान्, पुरुषार्थी, परोपकारमय एवं सद्भावनापूर्ण समाज के निर्माण के लक्ष्य को लेकर दिनांक 15-16 नवम्बर 2025 को महेन्द्र प्रताप सिंह पब्लिक स्कूल, झूंसी, अन्दावा चौराहा, ज़िला-प्रयागराज, उत्तरप्रदेश में ऋषिवर सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के आशीर्वाद से अत्यन्त ही भव्यतापूर्वक 24 घंटे का श्री दुर्गाचालीसा अखण्ड पाठ सम्पन्न किया गया।
इस पावन अवसर पर भगवती मानव कल्याण संगठन की केन्द्रीय अध्यक्ष शक्तिस्वरूपा बहन सिद्धाश्रमरत्न पूजा शुक्ला जी ने उपस्थित जनसमुदाय को सम्बोधित करते हुए में कहा कि ‘‘आप सभी लोगों को परम पूज्य गुरुवरश्री ने अपना आशीर्वाद प्रदान किया है।
हम अपने घरों में रामायण नहीं पढ़ते, गीता नहीं पढ़ते और जहाँ कथाएं होती हैं, वहाँ पहुंच जाते हैं तथा कथा के नाम पर जो रास-रंग की चीजें बतला दी गई , उसी में खो जाते हैं। इससे हममें भक्ति, ज्ञान और आत्मशक्ति जाग्रत् नहीं होतीं, क्योंकि आप उन गूढ़ रहस्यों से, गूढ़ ज्ञान से वंचित रहते हैं, जो वास्तव में हमारे धर्मग्रन्थों में दिए गए हैं। परम पूज्य गुरुवरश्री ने कहा है कि जो सबकुछ जानती हैं, जो जगत् की जननी हैं, जो सम्पूर्ण ब्रह्मांड की जननी हैं, वह भक्ति, ज्ञान और आत्मशक्ति की प्रदाता हैं, तो इधर-उधर भटकने की अपेक्षा यदि आपको कुछ मांगना ही है, तो माता भगवती आदिशक्ति जगत् जननी से भक्ति, ज्ञान और आत्मशक्ति मांगो और जिन्हें यह मिल गया, तो समझिए कि सबकुछ मिल गया। लेकिन, ये तीनों वरदान कब प्राप्त होंगे? जब आपके अन्दर अपने गुरु के प्रति प्रबल शिष्यत्व की भावना होगी, माता भगवती के प्रति प्रबल भक्ति की भावना होगी।
शिष्यत्व हो, जो शबरी जैसी। अपने गुरु के निर्देश पर भगवान् श्रीराम के आगमन की वर्षों प्रतीक्षा करती रहीं। नित्यप्रति सुबह उठतीं चुन-चुनकर पुष्प तोड़तीं और राह पर बिछा देतीं। क्योंकि, शबरी के गुरु ने कहा था कि तुम यहीं रहना, भगवान् श्रीराम आएंगे और तुम्हारा उद्धार करेंगे। आखिर श्रीराम आए और दर्शन देकर शबरी के जीवन को धन्य बना दिया और भक्ति हो, तो हनुमान जी जैसी, जिनके रोम-रोम में श्री राम बसते हैं।
सद्गुरु की वाणी कभी असत्य नहीं होती और हमारे सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज ने कहा है कि ‘एक दिन समाज में परिवर्तन होकर रहेगा’, तो परिवर्तन होगा। केवल हमने जो आत्मकल्याण और जनकल्याण का बीड़ा उठाया है, उस दिशा में हमारे क़दम बढ़ते रहना चाहिए, कभी भी किसी भी स्थिति-परिस्थिति में हमारे क़दम रुकने नहीं चाहिए। हमारे गुरुवर की वाणी सत्य होकर रहेगी।’
भारतीय शक्ति चेतना पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष शक्तिस्वरूपा बहन सिद्धाश्रमरत्न संध्या शुक्ला जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि ‘‘ इस कलिकाल के भयावह वातावरण से त्रस्त हो चुके, अनीति-अन्याय-अधर्म से त्रस्त हो चुके, भय-भूख-भ्रष्टाचार से त्रस्त हो चुके, जातिभेद, छुआछूत से त्रस्त हो चुके समाज को अब यह संदेश देने का समय आ चुका है कि आओ, हम पुन: लौट चलें अपने ऋषि-मुनियों की परम्पराओं की ओर, अपनी सनातनसंस्कृति की ओर, जिस पर चल करके हमारा यह देश सोने की चिड़िया कहलाता था। जिस भारत देश में हमारे लाखों ऋषियों-मुनियों ने तप करके समाज को चेतनावान् बनाया, जिस देश में करोड़ों देशभक्तों ने जन्म लेकरके देश की सेवा की, उस धरा को आज धर्मयोद्धाओं की आवश्यकता है, शक्तिसाधकों की आवश्यकता है और यही संदेश देने के लिए परम पूज्य सद्गुरुदेव जी महाराज के निर्देशन पर इस दिव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।
परिवर्तन का समय आ चुका है और आप सभी को इस दिशा में क़दम बढ़ाने होंगे। हर व्यक्ति अपने जीवन से परेशान है, हर व्यक्ति तनाव से ग्रसित है, क्योंकि सभी धन कमाने की अंधीदौड़ में दौड़ते चले जा रहे हैं। परम पूज्य गुुरुदेव जी ने कहा है कि ‘धन कमाने से आपको मना नहीं किया गया है, मगर धन कमाने की दौड़ में इतने अंधे मत होजाओ कि अपना धर्म ही खो बैठो। चूंकि यदि धर्म को छोड़कर धन कमा भी लिया, तो यह धन न तुम्हारे काम आएगा और न तुम्हारी आने वाली पीढ़ी के काम आएगा। यह सुरदुर्लभ मानवजीवन हमें सत्कर्म करने के लिए प्राप्त हुआ है।’ तो क्यों न इस जीवन को सत्कर्म की ओर मोड़ दिया जाए, धर्मपथ की ओर मोड़ दिया जाए, देशसेवा की ओर मोड़ दिया जाए? तो आइए, हम सब मिलकर सम्पूर्ण समाज को नशे-मांसाहार से मुक्त चरित्रवान्, चेतनावान्, पुरुषार्थी और परोपकारी बनाएं।’’
भगवती मानव कल्याण संगठन के केन्द्रीय महासचिव सिद्धाश्रमरत्न अजय अवस्थी जी ने अपनी चिरपरिचित शैली में कहा कि ‘‘मेरे भाईयों, बहनों कोई भी काम बिना कारण के नहीं होता है। अगर श्रीराम पैदा हुए, तो उसी दिन रावध का वध होना तय होगया था, श्रीकृष्ण पैदा हुए, तो उसी दिन कंस का वध और अनीति-अन्याय-अधर्म के विरुद्ध महाभारत का युद्ध तय होगया था और अब यदि स्वयं सच्चिदानंद आए हैं, तो इस भारतभूमि का कल्याण होना तय हो चुका है।
यह जो अनुष्ठान है, कोई साधारण अनुष्ठान नहीं है और मैं यह दावे के साथ कह सकता हूँ कि अगर कोई साधक हो, तो यहाँ की ऊर्जा का परीक्षण कर ले। जहाँ भी ये दिव्य अनुष्ठान होते हैं, वहाँ समस्त आध्यात्मिक शक्तियाँ उपस्थित होजाती हैं। आज संकल्प का दिन है और अगर आप चाहें तो इस दिव्य अनुष्ठान स्थल पर अपने अवगुणों का त्याग करने का संकल्प ले सकते हैं। जो नशे से ग्रसित हों, वे नशामुक्त होने का संकल्प ले लें, उन्हें माता भगवती की कृपा अवश्य प्राप्त होगी। चाहे किसी भी प्रकार का अवगुण हो, यदि यहाँ पर संकल्प लेकर त्याग देते हैं, तो यह निश्चित है कि कोई भी भक्त यहाँ से खाली हाथ वापस नहीं जाएगा।’’
भारतीय शक्ति चेतना पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सिद्धाश्रमरत्न सौरभ द्विवेदी ‘अनूप’ जी ने अपनी सौम्य वाणी में कहा कि ‘‘ हमारा अपना कोई अस्तित्व नहीं, सबकुछ सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज का कृपा प्रसाद है। जिसे हम पाते हैं और आकर आप लोगों को देने का प्रयास करते हैं कि जो हमने पाया है, आप भी पा लीजिए। भाईयों, बहनों आप लोग धर्मवान हैं, धर्म का पालन करने वाले हैं। यह प्रयागराज देवताआें की धरती है, माँ गंगा, यमुना, सरस्वती की धरती है। लेकिन, सौभाग्य की बात यह कि सद्गुरुदेव जी महाराज ने अथक तप करके माता भगवती की कृपा से जो रास्ता पाया, उसे सही समझा और उन्होंने 30 लाख से अधिक नशे-मांसाहार से मुक्त चरित्रवान् शक्तिसाधक तैयार कर दिए। परम पूज्य गुरुवरश्री ने वही रास्ता समाज को बताया है।
वर्तमान विषमताओं से निजात दिलाने के लिए परम पूज्य गुरुदेव जी ने एक सशक्त विचारधारा दी है, जो भगवती मानव कल्याण संगठन की विचारधारा कहलाती है। वह विचारधारा है आचरण में परिवर्तन करके, देवी-देवताओं की कृपा को प्राप्त करते हुए अपने जीवन को दिव्य बना लेना, अपने जीवन को देवत्व के समान बना लेना और अपने जीवन से कमजोरी को, असहायता को समाप्त कर देना। अगर हम चाहें, तो सबकुछ कर सकते हैं, सबकुछ पा सकते हैं।
कोई भी व्यक्ति अगर अपने आपको धार्मिक कहता है, वह पूजा-पाठ करने वाला है, किन्हीं भी देवी-देवताओं को मानने वाला है, तो वह कभी भी अशान्त व तनावग्रसित नहीं हो सकता, वह कभी भी भयग्रस्त जीवन नहीं बिता सकता और यदि उसका जीवन अशान्त है, तनावग्रसित है, भयपूर्ण है, तो वह धार्मिक हो ही नहीं सकता। वह धर्म के रास्ते पर नहीं चल रहा होता, क्योंकि धर्म हमें अशान्ति से शान्ति की ओर ले जाता है। धर्म हमें अन्धकार से प्रकाश की ओर ले जाता है।’’
उद्बोधन क्रम के अन्त में फूलपुर के सांसद प्रवीण पटेल जी ने कार्यक्रम में उपस्थित जनसमुदाय के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि ‘‘ यह प्रयागराज आध्यात्मिक नगरी है और सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के आशीर्वाद से आज यहां दिव्य अनुष्ठान सम्पन्न हुआ। परम पूज्य गुरुवरश्री के चिन्तन के अनुरूप हमारे देश का, हमारे क्षेत्र का, हमारे समाज का आध्यात्मिक व भौतिक विकास हो, यही मेरा प्रयास रहता है।’’





























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