बैकुण्ठपुर, रीवा। ऋषिवर सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के आशीर्वाद से माँ शक्ति इन्टरप्राइजेज एवं फर्नीचर हाउस, बैकुण्ठपुर, पुराने थाने के पास, ज़िला-रीवा में दिनांक 15-16 मार्च को भगवती मानव कल्याण संगठन एवं पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम ट्रस्ट के संयुक्त तत्त्वावधान में 24 घंटे का श्री दुर्गाचालीसा अखण्ड पाठ सम्पन्न किया गया।
कार्यक्रम की समापन बेला में भगवती मानव कल्याण संगठन के केन्द्रीय महासचिव व भारतीय शक्ति चेतना पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सिद्धाश्रमरत्न सौरभ द्विवेदी ‘अनूप’ जी ने अपनी विशिष्ट शैली में उपस्थित जनसमुदाय, धर्मप्रेमियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि ‘‘कहते हैं कि धर्म-कर्म करने से कल्याण होता है और हम उस कल्याण की बात करें, तो पाएंगे कि भगवती मानव कल्याण संगठन से जुड़े व्यक्ति की समाज में एक अलग पहचान है। वह चाहे किसी भी जाति का हो, अमीर हो, ग़रीब हो, उसके चेहरे पर एक अलग ही चेतनात्मक तेज नज़र आएगा। चूंकि उसने परम पूज्य गुरुवर की चेतना को अपने अन्तस में धारण किया है।
परम पूज्य गुरुदेव जी कहते हैं कि अपने अन्दर समाहित दिव्यशक्तियों को जानने-समझने के लिए सबसे पहले तुम्हें साधना करना पड़ेगा और अगर तुम सुबह-शाम साधना नहीं करोगे, तो न अपने अन्दर की शक्तियों को पहचान पाओगे और न ही परिवार व समाज का भला कर पाओगे। संगठन के हर व्यक्ति के घर में सुबह-शाम साधना होती है और यही कारण है कि उनकी आत्मशक्ति प्रबल है तथा वे लाखों-लाख लोगों के जीवन में परिवर्तन डाल रहे हैं।
शान्ति कैसे मिले? करोड़ों रुपए कमा लेने से कोई बड़ा आदमी नहीं बन जाता और न ही उसके जीवन में शान्ति आती है। बड़ा आदमी वह है, जो साहृदय है, जो दूसरों के लिए कुछ अच्छा करने की इच्छा रखता है, दूसरों के जीवन में खुशियाँ लाने की इच्छा रखता है और उसे ही शान्ति नसीब होती है। करोड़ों रुपए कमा लेने से शान्ति नहीं मिल सकती, अपितु शान्ति मिलती है सन्तुष्टि के भाव से और सन्तुष्टि परोपकार व पुरुषार्थ में निहित है। अत: नशा-मांसाहार से रहित, जातिभेद-छुआछूत से रहित, अगर आप अपना जीवन जी रहे हो, आप चरित्रवान् हैं, परोपकारी हैं, पुरुषार्थी हैं, तो इस कलियुग में आप देवताओं के समान हैं, देवताओं के समान नहीं, बल्कि आप देवता ही हो। तो, आप चौबिसों घण्टे चैतन्यता से परिपूर्ण वातावरण में रहें, अपने इष्ट व सद्गुरुदेव की नित्यप्रति साधना-आराधना करें, नशे-मांसाहार से मुक्त चरित्रवान्, चेतनावान्, पुरुषार्थी और परोपकारमय जीवन धारण करें, मानवता की सेवा, धर्मरक्षा व राष्ट्ररक्षा जैसे मानवीय कर्त्तव्यों के निर्वहन के प्रति हमेशा सजग रहें।
परम पूज्य सद्गुरुदेव जी महाराज ने मानवता की सेवा के लिए भगवती मानव कल्याण संगठन, धर्मरक्षा के लिए पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम और राष्ट्ररक्षा के लिए भारतीय शक्ति चेतना पार्टी के रूप में पावन पवित्र तीन धाराएं प्रवाहित की हैं और इस त्रिवेणी में जो अन्त:स्नान करेगा, वही मानवजीवन की पूर्णता को प्राप्त करेगा।’’
सिद्धाश्रमरत्न सौरभ द्विवेदी जी ने आवाहन किया कि ‘‘मातेश्वरी जगदम्बे व दिव्यशक्तियों और सद्गुरुदेव जी महाराज के दिव्यदर्शन के लिए, वहाँ प्रवाहित दिव्य चेतनातरंगों को आत्मसात करने के लिए पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम आते रहें, अपने साथ नए लोगों को भी साथ में लेकर पहुंचे, जिससे उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ सके।




























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