गर्मियों के मौसम में पसीना आना शरीर की एक स्वाभाविक और जरूरी प्रक्रिया है (जिससे शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है)। लेकिन जब पसीना त्वचा पर ज्यादा देर तक रुकता है, तो वहां बैक्टीरिया और फंगस पनपने लगते हैं। यही कारण है कि मई-जून के महीनों में दाद, खाज, खुजली, घमौरियां और पसीने की भयंकर बदबू जैसी त्वचा की बीमारियां सबसे ज्यादा होती हैं। इन समस्याओं से बचने के लिए बाजार के टेलकम पाउडर या केमिकल वाले साबुन केवल त्वचा के रोमछिद्रों (Pores) को बंद करते हैं, जो नुकसानदायक है।
प्रकृति ने त्वचा की रक्षा के लिए हमें ‘नीम’ (Margosa) के रूप में एक सबसे शक्तिशाली एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल जड़ी-बूटी दी है।
नीम के पानी से स्नान का महत्व
नीम के पत्तों में ऐसे औषधीय गुण होते हैं जो त्वचा के किसी भी प्रकार के संक्रमण (Infection) को जड़ से खत्म कर देते हैं।
घमौरियों और खुजली से तुरंत राहत
नीम का पानी त्वचा की गहराई से सफाई करता है। यह पसीने की ग्रंथियों (Sweat Glands) को खोलता है और वहां पनप रहे बैक्टीरिया को मार देता है, जिससे खुजली और पसीने की बदबू प्राकृतिक रूप से दूर हो जाती है।
नीम का पानी कैसे तैयार करें?
सुबह नहाने से 10-15 मिनट पहले, एक बर्तन में पानी लें और उसमें दो मुट्ठी ताजे नीम के पत्ते डालकर अच्छी तरह उबाल लें (जब तक पानी का रंग हल्का हरा न हो जाए)। अब इस उबले हुए नीम के पानी को अपने नहाने की बाल्टी (सादे पानी) में मिला लें। इस औषधीय पानी से स्नान करें और इसके बाद साबुन का प्रयोग बिल्कुल न करें।
कार्यकारी संपादक, संकल्प शक्ति
बृजपाल सिंह चौहान (एन. डी.) नेचुरोपैथी
www.bschauhan09.blogspot.com , www.facebook.com/bschauhan09





























Views Today : 32
Views Last 7 days : 259
Views Last 30 days : 1299
Views This Year : 7061
Total views : 107534
Who's Online : 0
Your IP Address : 216.73.217.31