गर्मी के तपते दिनों में जब पंखे और कूलर भी जवाब दे जाएँ, तब भारत की गलियों में एक ऐसा पेय अपनी ठंडी छाप छोड़ता है, जो न सिर्फ़ ताजगी देता है, बल्कि स्वाद की ऐसी सैर कराता है कि बस दिल खुश हो जाए। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं ठंडाई की, उस पारंपरिक पेय की, जो बादाम, सौंफ, केसर और गुलाब की पंखुड़ियों से सजा एक जादुई मिश्रण है। आइए जानें,इस स्वादिष्ट ठंडाई की कहानी को जो आपको ठंडाई का दीवाना बना देगी!
ठंडाई: एक पेय या संस्कृति का स्वाद?
ठंडाई सिर्फ़ एक ड्रिंक नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध संस्कृति का एक हिस्सा है। होली के रंगों से लेकर शिवरात्रि की भक्ति तक, ये पेय हर उत्सव का साथी है। इसे तैयार करने में बादाम, सौंफ के बीज, तरबूज के बीज, गुलाब की पंखुड़ियाँ, काली मिर्च, खसखस, इलायची, केसर, दूध और चीनी का ऐसा संगम होता है, जो स्वाद और सेहत का खजाना है।
स्वाद का जादू,
सेहत का राज
ठंडाई सिर्फ़ स्वाद में ही नहीं, सेहत में भी अव्वल है। आयुर्वेद के जानकारों के मुताबिक सौंफ और इलायची पाचन को दुरुस्त रखते हैं, जबकि केसर और बादाम दिमाग को तरोताजा करते हैं। खसखस ठंडक देता है, जो गर्मियों में वरदान है।
कैसे बनती है
ये जादुई ड्रिंक?
ठंडाई बनाना एक कला है। पहले बादाम, खसखस और तरबूज के बीजों की गुठली को भिगोकर पीसा जाता है। फिर सौंफ, इलायची और काली मिर्च को पीसा जाता है। केसर को दूध में घोलकर उसका रंग और सुगंध मिलाई जाती है। गुलाब की पंखुड़ियाँ और चीनी डालकर इसे ठंडे दूध में मिश्रित किया जाता है। बस, तैयार है आपकी ठंडाई! वाराणसी की गलियों में ठंडाई वाले भइया इसे मिट्टी के कुल्हड़ में परोसते हैं, जो स्वाद में मिट्टी की सौंधी खुशबू जोड़ देता है।
तो, तैयार हैं ठंडाई,
चुस्की के लिए
चाहे आप गर्मी से राहत पाना चाहें या बस स्वाद का मजा लेना हो, ठंडाई हर मूड की साथी है। तो इस गर्मी, अपने दोस्तों को बुलाइए, एक गिलास ठंडाई आॅर्डर कीजिए और उस ठंडक का मजा लीजिए, जो सिर्फ़ भारत का ये जादुई पेय दे सकता है।
कार्यकारी संपादक
डॉ. बृजपाल सिंह चौहान
(एन. डी.) नेचुरोपैथी
www.bschauhan09.blogspot.com
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