संकल्प शक्ति। जिस तरह सूर्यकिरणों के आगमन से कमल विहंस उठते हैं, ठीक उसी तरह शान्तरूप और मणिवत निर्मल नव सिद्धाश्रम चेतना अधीश जी के पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम आगमन पर सभी सिद्धाश्रमवासी और ‘माँ’ के भक्त विहंस उठे।
पूजनीया महातपस्विनी शक्तिमयी माताजी मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से दिनांक 08 मार्च, महाशिवरात्रि को शक्तिस्वरूपा बहन संध्या शुक्ला जी और सिद्धाश्रमरत्न सौरभ द्विवेदी जी के साथ नव सिद्धाश्रम चेतना अधीश जी को लेकर जैसे ही पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम पहुंचीं, सिद्धाश्रमवासियों ने ‘माँ’-गुरुवर के जयकारों व शंखध्वनि करके उनकी अगवानी की। इस दौरान जहाँ बैण्डबाजे की स्वरलहरियाँ चहुंओर विखर रहीं थीं, वहीं रह-रहकर पटाखों की फुलझडिय़ां छूट रहीं थीं।
नव सिद्धाश्रम चेतना को देखकर सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज ने उसे अपनी गोद में ले लिया और अधीश जी के आज्ञाचक्र को स्पर्श करके अध्यात्म से परिपूर्ण सुदीर्घ जीवन का आशीर्वाद प्रदान किया। इस दौरान बैण्ड बाजे की धुन के साथ प्रसन्नता से अविभूत सिद्धाश्रमवासी व ‘माँ’ के भक्त नृत्य करते रहे।
इससे पहले पूजनीया माता जी, शक्तिस्वरूपा बहन संध्या जी और सौरभ द्विवेदी जी तथा साथ में चल रहे परिजन सर्वप्रथम गोशाला गये और गऊदर्शन के बाद पूज्य दण्डी संन्यासी स्वामी श्री रामप्रसाद आश्रम जी महाराज की समाधिस्थल पर पहुँचकर सभी ने स्वामी जी को नमन किया।




























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