आजकल बच्चों से लेकर बड़ों तक हर किसी को मैदा खाने की आदत होती है। मैदा का सेवन घर में बनने वाले छोले-भटूरे या बाज़ार में मिलने वाले पिज्जा, समोसा आदि में हर तरीके से किया जाता है। मैदा एक रिफाइंड प्रोडक्ट है, इसलिए इसके ज़्यादा सेवन से सेहत को नुकसान भी हो सकता है। मैदा के बारे में कई लोग यह भी मानते हैं, कि यह आंतों में चिपकने लगता है, लेकिन यह सच नहीं है।
एक्सपर्ट के मुताबिक, मैदा आंतों में चिपकता नहीं है, क्योंकि जब हम मैदा खाते हैं, तो इसे पकाकर खाते हैं। इसलिए मैदा के बारे में यह धारणा गलत है, लेकिन अगर आप मैदा का सेवन ज़्यादा करते हैं, तो इससे आपका पाचनतंत्र खराब हो सकता है। अधिक सेवन से आपको पेट दर्द, एसिडिटी और खासकर कब्ज की समस्या हो सकती है। इसमें फाइबर बहुत कम मात्रा में होता है, जिस कारण इसे पचाने में थोड़ी परेशानी होती है। साथ ही, मैदा के सेवन से ब्लड शुगर लेवल भी बढ़ सकता है।
पाचनतंत्र को स्वस्थ रहने के लिए डायट्री फाइबर की ज़रूरत होती है, लेकिन गेंहू के आटे से मैदा बनाते वक्त उसमें से फाइबर निकाल दिया जाता है। इसलिए जब हम मैदा का ज़्यादा सेवन करते हैं, तो इससे हमारे शरीर को फाइबर नहीं मिलता है। फाइबर की कमी होने के कारण खाने को पचाने में मुश्किल होती है। इसलिए हमें कब्ज या एसिडिटी जैसी समस्याएं होने लगती हैं।
इन बातों का भी रखें ध्यान
अगर आप संतुलित मात्रा में मैदा का सेवन करते हैं, तो यह आपके लिए नुकसानदायक नहीं होगा। अगर आप मैदा का सेवन कर भी रहे हैं, तो ध्यान रखें कि सब्जि़यों की मात्रा ज़्यादा रखें। इससे आपके शरीर को पर्याप्त फाइबर मिलेगा और आपको कब्ज की समस्या नहीं होगी। मैदा का सेवन करते वक्त ध्यान रखें कि आप इसे उबालकर और भूनकर ही सेवन करें। इससे यह पचने में आसान होजाता है।
अगर आपको कोई स्वास्थ्य समस्या या पाचन से जुड़ी समस्या रहती है, तो मैदा के सेवन से परहेज रखें। मैदा के ज़्यादा सेवन से आपका वजन भी बढ़ सकता है। इसलिए इसे कम मात्रा में ही सेवन करें।





























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