संकल्प शक्ति। मध्यप्रदेश के टाइगर रिजर्व की वर्तमान स्थिति मिश्रित है, जहाँ एक ओर बाघों की संख्या में वृद्धि के सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं, वहीं बाघों की लगातार होती मौतें और पैट्रोलिंग में कमियाँ वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व
बांधवगढ़ में नवंबर 2025 से फ़रवरी 2026 के बीच 08 बाघों की मौत दर्ज़ की गई है, जिनमें से 04 की मौत बिजली का करंट लगने से हुई है।
कानूनी कार्रवाई: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने इन मौतों पर कड़ा संज्ञान लेते हुए फील्ड डायरेक्टर से विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट माँगी है।
गणना की तैयारी: यहाँ 2026 की राष्ट्रीय बाघ गणना के लिए फील्ड स्टाफ का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है।
पन्ना टाइगर रिजर्व
हाल ही में (अप्रैल 2026) यहाँ एक युवा वयस्क बाघ का कंकाल मिला है, जो लगभग 20-25 दिन पुराना बताया जा रहा है। यह घटना रिजर्व की पैट्रोलिंग टीम की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल उठाती है।
पेंच टाइगर रिजर्व
यहाँ हाल ही में लंबी चोंच वाले गिद्धों का पुनर्वास किया गया है, जो पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
ट्रेनिंग हब: पेंच में ‘अखिल भारतीय बाघ अनुमान – 2026’ के लिए क्षेत्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई है।
नए टाइगर रिजर्व और विस्तार
माधव टाइगर रिजर्व शिवपुरी के माधव राष्ट्रीय उद्यान को मार्च 2025 में आधिकारिक तौर पर भारत का 58वाँ और मध्यप्रदेश का 9वाँ टाइगर रिजर्व घोषित किया गया है।
रातापानी: रायसेन जिले में स्थित रातापानी को भी टाइगर रिजर्व का दर्जा मिल चुका है, जिससे यहाँ पर्यटन और संरक्षण को बल मिला है।
रानी दुर्गावती (नौरादेही): इसे जुलाई 2026 तक चीतों का तीसरा घर बनाने की तैयारी चल रही है, जहाँ कूनो के बाद अफ्रीकी चीतों को बसाया जाएगा।
आगामी ‘टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर’
राज्य सरकार रु.5,000 करोड़ की लागत से 625 किमी लंबा टाइगर कॉरिडोर बनाने की योजना पर काम कर रही है।
यह कॉरिडोर पेंच, कान्हा, बांधवगढ़ और पन्ना को आपस में जोड़ेगा, जिससे वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन और पर्यटन विकास को बढ़ावा मिलेगा।




























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