जून-जुलाई की चिपचिपी गर्मी (Pre-Monsoon) में हवा का दबाव बदलता है, जिसका सीधा असर हमारे पेट की गैस (Vata) पर पड़ता है। खाना खाने के तुरंत बाद पेट फूल जाना, खट्टी डकारें आना या पेट में भारीपन महसूस होना इस मौसम की सबसे आम समस्याएं हैं। ऐसे में बाजार की गैस या एसिडिटी की गोलियां खाने से हमारी आंतों का प्राकृतिक ‘एसिड’ नष्ट हो जाता है।
प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार, आपके किचन में मौजूद ‘जीरा’ और ‘अजवाइन’ दुनिया की सबसे बेहतरीन और सुरक्षित पाचक औषधियां हैं।
जीरा: पेट का प्राकृतिक ‘कूलर’ और पाचक
जीरा संस्कृत के ‘जीर्ण’ शब्द से बना है, जिसका अर्थ ही है ‘पचाने वाला’। इसकी तासीर ठंडी होती है। यह हमारे मुंह में लार (Saliva) और पेट में पाचक रसों को उत्तेजित करता है।
•प्रयोग: सुबह उठकर एक गिलास पानी में आधा चम्मच जीरा उबालें, जब पानी आधा रह जाए तो उसे हल्का गुनगुना करके घूंट-घूंट पिएं। यह आंतों की सूजन और गर्मी को तुरंत शांत कर देता है।
•अजवाइन: जिद्दी गैस को तोड़ने वाला ‘ब्रह्मास्त्र’
जहां जीरा ठंडक देता है, वहीं अजवाइन की तासीर गर्म होती है। जब उमस के कारण खाना पेट में सड़ने लगता है और भयंकर गैस बनती है, तब अजवाइन अपने अंदर मौजूद ‘थाइमोल’ (Thymol) नामक तत्व से उस गैस के बुलबुलों को तोड़ देती है। यह पेट दर्द और मरोड़ में किसी पेनकिलर से भी तेज काम करती है।
कार्यकारी संपादक, बृजपाल सिंह चौहान (एन. डी.) नेचुरोपैथी
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