नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के दो जस्टिसों ने अपने ही सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कुछ मुद्दों पर एतराज जताया है। जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एएस ओका की बेंच ने कहा कि नए लिस्टिंग सिस्टम में मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को सुनवाई का प्रावधान किया गया है, लेकिन ऐसे में उनके पास किसी भी मामले पर फैसला लेने के लिए बहुत कम समय बचता है। बेंच ने अपने आदेश में कहा कि कि दोपहर के सेशन में केसों की भरमार होजाती है।
एक मामले की सुनवाई के दौरान बेंच ने ये बात कही। जस्टिस कौल सुप्रीम कोर्ट को कोलोजियम के सदस्य भी हैं। हालांकि कॉलेजियम सिस्टम का भारत के संविधान में कोई जिक्र नही है। यह 1998 को सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के ज़रिए प्रभाव में आया था। कॉलेजियम सिस्टम में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और सुप्रीम कोर्ट के 04 वरिष्ठ जजों का एक पैनल जजों की नियुक्ति और तबादले की सिफारिश करता है। कॉलेजियम की सिफारिश मानना सरकार के लिए आवश्यक होता है।
जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एएस ओका की बेंच ने एतराज ज़ाहिर करते हुए कहा कि मुकदमों की भरमार से बेंच दब रही हैं। समय नहीं मिलेगा तो कैसे बेंच फैसला कर पाएंगी। नए सिस्टम में बिलकुल भी समय नहीं मिल पा रहा है, जो बेंच मामले की सुनवाई कर सकें।





























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