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नशा सबसे बड़ी महामारी है, जो व्यक्ति को पागल बना देती है: सौरभ द्विवेदी

पैलानी, बांदा, संकल्प शक्ति। सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के आशीर्वाद से दिनांक 13-14 दिसम्बर 2025 को मधु मैरिज हॉल, तहसील-पैलानी, ज़िला-दमोह में 24 घंटे का श्री दुर्गाचालीसा अखण्ड पाठ भक्ति से परिपूर्ण वातावरण में सम्पन्न किया गया।

समापन बेला में भारतीय शक्ति चेतना पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सिद्धाश्रमरत्न सौरभ द्विवेदी ‘अनूप भईया’ जी ने पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम की महिमा का बखान करते हुए कहा कि ‘‘सिद्धाश्रम धाम एक ऐसा पावन पवित्र स्थल है, जहाँ पिछले 28 वर्ष से अनन्तकाल के लिए अनवरत श्री दुर्गाचालीसा का अखण्ड पाठ चल रहा है। 

सद्गुरुदेव जी महाराज ने अपनी चेतनाशक्ति से जाना कि आमजनमानस देश में व्याप्त अनीति-अन्याय-अधर्म से पीड़ित है, कथित धर्माधिकारियों ने धर्म को धंधा बना लिया है, उनके द्वारा भावनावान लोगों का ठगा जा रहा है। मंदिरों में जाने से पूर्वकाल में भावनावान लोगों को साधु-सन्तों की कृपा प्राप्त होती थी, लेकिन आज मंदिर भी स्वार्थपूर्ति के अड्डे बन गए हैं। गुरु जी ने समाज के बीच जाकर लोगों की वेदनाओं का जाना, समझा और साल 1997 में निर्णय लिया कि वे एक ऐसे तीर्थस्थल का निर्माण करेंगे, जहाँ भक्तजन पहुंचकर अपूर्व शान्ति का अनुभव करेंगे, उनके होठों पर मुस्कान होगी और उनकी मनोकामनाएं पूरी होंगी, उनके घर-परिवार में सुख-शान्ति का वातावरण बनेगा और गुरुवरश्री ने अपने कर्मबल से अपने संकल्प को चरितार्थ कर दिखाया।

    जैसा कि आप सभी लोगों को विदित है कि सिद्धाश्रम स्थापना दिवस पर्व पर 22-23 जनवरी को उसी तीर्थस्थल पर शक्ति चेतना जनजागरण ‘योग साधना’ शिविर लगेगा, उस शिविर में आप सभी लोग पहुंचें और शिविर में तीनों दिवस होने वाली दिव्य आरती का लाभ लें। नशा करने वाले शिविर में अवश्य पहुंचें, गुरुदेव जी के आशीर्वाद और  दिव्य आरती के प्रभाव से उनका नशा छूट जाएगा। इस पैलानी नगर में ही पूर्व में भगवती मानव कल्याण संगठन से दो-चार लोग ही जुड़े थे, लेकिन पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम में नित्यप्रति होने वाले आरतीक्रम व शिविरों में होने वाली आरतियों के दिव्यप्रभाव से आज हज़ारों लोग नशे-मांसाहार से मुक्त होकर, जातपात, छुआछूत की भावना से ऊपर उठकर संगठन से जुड़ चुके हैं और समाज को चेतनावान् बनाने का कार्य कर रहे हैं। गुरुवर ने आशीर्वाद दिया है कि ‘जो भी मेरे शिविर में आकरके दिव्य आरतियों का एकाग्रमन से लाभ लेगा, उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन होगा और यदि कोई नशा करने वाला है, चाहे कई सालों से नशा करने वाला हो, यदि वह नशा छोड़ना चाहता है और उसका नशा नहीं छूट रहा है, तो उसका नशा छूट जाएगा।’

भाईयों-बहनों, भगवती मानव कल्याण संगठन जातपात, छूआछूत नहीं मानता और परम पूज्य गुरुवर की कृपा से आज हमारे बीच छोटे-बड़े का कोई भेद नहीं है। सभी जाति के लोग एकसाथ बैठकर माता भगवती आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा की आराधना करते हैं, श्री दुर्गाचालीसा का पाठ करते हैं और चाहे सिद्धाश्रम धाम में हो, दिव्य अनुष्ठान के कार्यक्रम हों, चाहे शिविर हों, वहाँ समभाव से एकसाथ बैठकर भोजन करते हैं।

हमारे संगठन का मुख्य उद्देश्य लोगों को नशा, मांसाहार व जातिगत छूआछूत से दूर करना है। क्योंकि, जब तक किसी भी व्यक्ति के जीवन में ये तीन कांटे रहेंगे, वह जीवन में कभी भी सुखी नहीं रहेगा, उसे घर-परिवार में देवी-देवताआें की कृपा हो ही नहीं सकती, भले ही कितना ही पूजा-पाठ क्यों न हो रहा हो। 

आज समूचा देश नशे की विभीषिका से जूझ रहा है, नशा सबसे बड़ी महामारी है, जो व्यक्ति को पागल बना देती है, अत: नशे से दूर रहें। नशे का निर्माण करने वाली कंपनियाँ भी शराब की बोतलों, गुटखा व सिगरेट के पैकटों में यह दर्शाती हैं कि यह जानलेवा है, फिर भी केन्द्र और राज्य सरकारें जनता जनार्दन को शराब पिला रही हंै, जिससे लोग पागल होते रहें और उनकी मनमानी चलती रहे। अब भी समय है, सजग होजाओ, अन्यथा सबकुछ बरबाद हो जाएगा।  मैं सभी लोगों का आवाहन करता हूँ कि संगठन से जुड़कर उसकी विचारधारा पर चलिए, परिवर्तन होकर रहेगा।’’

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      ” पुरुषार्थ व परोपकार के पथ पर चले: आशीष शुक्ला ” 

भगवती मानव कल्याण संगठन के केन्द्रीय मुख्य सचिव आशीष शुक्ला (राजू भईया) जी ने उपस्थित जनसमुदाय को सम्बोधित करते हुए सारगर्भित शब्दों में कहा कि ‘‘पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम धाम की अपूर्व महिमा से जुड़कर हम सभी भक्तों ने 24 घंटे तक चले इस अनुष्ठान का लाभ प्राप्त किया। गुरुवर ने कहा है कि ‘आप वह शक्तिसाधक हो कि आप किसी को प्रभावित करने का कार्य नहीं करोगे, आप किसी को प्रताड़ित करने का कार्य नहीं करोगे, अपितु ‘माँ’ की भक्ति के पथ पर बढ़कर ‘माँ’ की ऊर्जा को अपने हृदय में धारण करके, एक शक्तिसाधक का परिवेश धारण करके समाज को प्रकाशित करने का कार्य करोगे।’

ध्यान रखें, जीवन में सुख-शांति को प्राप्त करने के लिए आध्यात्मिक शक्ति होनी चाहिए और यह शक्ति आपको तभी प्राप्त होगी, जब आप नशे-मांसाहार से मुक्त, चरित्रवान् जीवन अंगीकार करेंगे, जातपात, छूआछूत जैसी निकृष्ट भावना से सर्वथा दूर रहेंगे और पुरुषार्थ व परोपकार के पथ पर चलेंगे। अपने चरित्र को इतना पावन बना लें कि जो भी कर्म करें, वह ‘माँ’ को समर्पित हो। हमारे अच्छे कर्म ही हमको साहसी और जीवंत बनाएंगे।’’

उद्बोधनक्रम के उपरान्त, दिव्य अनुष्ठान में शामिल सभी भक्त  शक्तिजल और प्रसाद प्राप्त कर धन्य हुए।

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