भीषण गर्मी में जब हम घर से बाहर निकलते हैं, तो शरीर का तापमान अचानक बढ़ जाता है। इस बढ़ी हुई गर्मी (पित्त) के कारण शरीर से बहुत अधिक पसीना निकलता है, जिससे ऊर्जा का स्तर (Energy level) शून्य हो जाता है। कई लोगों, विशेषकर बच्चों की नाक से खून (नकसीर) आने लगता है और भयंकर थकान हावी हो जाती है। शरीर की ऊर्जा को संरक्षित (Conserve) करने और भीतर ‘एसी’ (AC) जैसी ठंडक पैदा करने के लिए आयुर्वेद ने एक बहुत ही मीठी औषधि दी है— ‘गुलकंद’।
गुलाब की पंखुड़ियों का चमत्कार
गुलकंद केवल एक मीठा पदार्थ नहीं है; यह देसी गुलाब की ताजी पंखुड़ियों और धागे वाली मिश्री को 15 से 20 दिनों तक सूर्य की धूप में पकाकर (Sun-cooked) बनाया जाता है। धूप में पकने के कारण गुलाब के सारे औषधीय गुण (Essential oils) मिश्री में समा जाते हैं।
•अमृत समान शीतलता: गुलकंद की तासीर अत्यंत ठंडी होती है। यह आंतों की सूजन, पेट के छालों और अति-अम्लता (Hyperacidity) को तुरंत शांत करता है। यह शरीर के तापमान को इस तरह नियंत्रित करता है कि बाहर की लू (Heatstroke) शरीर पर असर ही नहीं कर पाती।
कार्यकारी संपादक, बृजपाल सिंह चौहान (एन. डी.) नेचुरोपैथी
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