कानपुर, 10 जून। कानपुर पुलिस और एसआईटी की संयुक्त टीम ने देश-विदेश में फर्जी शैक्षिक दस्तावेज बेचने वाले एक बहुत बड़े अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में मास्टरमाइंड जियाउल हसन उर्फ समीर सहित उसके भाई हसन आसिफ, नूरुद्दीन और आमिर अहमद को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह साल 2017 से सक्रिय था और हाईस्कूल से लेकर पीएचडी तक की हूबहू असली दिखने वाली फर्जी डिग्रियां और मार्कशीट तैयार कर करोड़ों रुपये की ठगी कर चुका है।
पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि गिरोह का मुख्य सरगना जियाउल हसन बेहद शातिर है। वह यूके के मोबाइल नंबर का उपयोग कर लोगों पर रौब झाड़ता था। जांच में सामने आया है कि आरोपी कनाडा में बैठे अपने सहयोगियों (भवीन और बारी) को कोरिल ड्रॉ फाइलों के रूप में फर्जी डिग्रियां भेजता था, जिनका उपयोग विदेशों में नौकरियां पाने के लिए किया जा रहा था।
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि गिरोह के तार आंध्रप्रदेश, तेलंगाना और मध्यप्रदेश से भी जुड़े हैं। वर्तमान में एसआईटी और क्राइम ब्रांच की 18 से अधिक टीमें फरार आरोपियों और इस रैकेट के जरिए फर्जी डिग्री खरीदकर नौकरी पाने वाले लोगों की तलाश में चार राज्यों में लगातार दबिश दे रही हैं। आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट, धोखाधड़ी और जालसाजी की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।




























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