नई दिल्ली। देश में जलवायु संकट गहराता जा रहा है और 2025 (जनवरी से सितंबर) में कई क्षेत्र मौसमी घटना की चपेट में रहे। देश ने लू, शीत लहर, बिजली, तूफान, भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन जैसी घटनाओं का सामना किया। इस भयावह स्थिति का मानवीय और आर्थिक दोनों तरह से भारी खामियाजा भुगतना पड़ा है। सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरनमेंट (सीएसई) और डाउन टू अर्थ की वार्षिक क्लाइमेट इंडिया 2025 रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक इन नौ महीनों में, चरम मौसमी घटनाओं ने 4,064 लोगों की जान ली, जो पिछले चार वर्षों की तुलना में 48 फीसदी की वृद्धि है। कृषि क्षेत्र सबसे ज़्यादा प्रभावित हुआ, जिसमें 9.47 मिलियन हेक्टेयर (करीब 47 मिलियन एकड़) फसल क्षेत्र प्रभावित हुआ, जो चार वर्षों में 400 फीसदी की भारी वृद्धि को दशार्ता है।
इसके अलावा, 99,533 घर नष्ट हुए और लगभग 58,982 जानवरों की मौत हुई। 2025 में, कम से कम 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 2022 के बाद से सबसे अधिक चरम मौसमी दिन दर्ज़ किए गए। फ़रवरी से सितंबर 2025 तक, लगातार आठ महीना देश के 30 या उससे अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चरम मौसम की घटनाएं रिकॉर्ड की गईं।
2025 में जलवायु के कई रिकॉर्ड टूटे
रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 में कई जलवायु रिकॉर्ड टूट चुके हैं। जनवरी 1901 के बाद पांचवां सबसे शुष्क महीना था, जबकि फ़रवरी 124 वर्षों में सबसे गर्म रहा। सितंबर में देश का सातवां सबसे अधिक औसत तापमान दर्ज़ किया गया। महाराष्ट्र 84 लाख हेक्टेयर के साथ फसल क्षेत्र के नुक़सान के मामले में सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्य था। क्षेत्रीय रूप से, उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में घटनाओं की सबसे अधिक आवृत्ति दर्ज़ की गई, जबकि मध्य क्षेत्र में 1,093 लोगों की मौतें हुईं




























Views Today : 18
Views Last 7 days : 165
Views Last 30 days : 642
Views This Year : 9323
Total views : 109796
Who's Online : 0
Your IP Address : 40.77.167.79