मौसम बदलते ही सर्दी-जुकाम में सबसे पहले नाक बहने लगती है। आमतौर पर मौसमी सर्दी-जुकाम 4-5 दिनों में अपने आप ठीक होजाता है, लेकिन तकलीफ अधिक न हो इसके लिए एहतियात ज़रूरी है।
यह सितम्बर माह है, यानि मॉनसून अब ज़ल्दी ही जाने वाला है और ऐसे में मौसमी बुखार व सर्दी-जुकाम का प्रकोप बढऩा स्वाभाविक है। अभी से ही कुछ लोग सर्दी-बुखार से परेशान होने लगे हैं। यद्यपि यह सीजनल परेशानियां समय के साथ खत्म होजाती हंै, लेकिन अतिरिक्त सतर्कता बरतकर इसकी गंभीरता को कम किया जा सकता है। इस मौसम में सीजनल सर्दी-जुकाम लोगों को बेहद परेशान करता है।
मौसमी सर्दी-जुकाम के लक्षण
सीजनल सर्दी-जुकाम में सबसे पहले नाक बहने लगती है। नाक से पानी बहुत अधिक परेशान करने लगता है और खांसी आना, गले में सूखापन लगना, सिरदर्द होना, इन लक्षणों के उत्पन्न होने के साथ ही बुखार भी लग सकता है।
हो सकता है इंफ्लुएंजा
सीजनल बुखार के साथ-साथ इंफ्लुएंजा होने की आशंका भी ज़्यादा रहती है। इंफ्लुएंजा में 3-4 दिनों तक तेज बुखार रहता है। कभी-कभी कंककपी और ठंडा पसीना आता है। सिर दर्द के साथ-साथ थकान भी रहती है। इसके अलावा कुछ अलग लक्षण भी दिखाई देते हैं जैसे कि सांस लेने में तकलीफ, छाती और पेट में दर्द, चक्कर आना, कंफ्यूजन, अलर्टनेस में कमी, पेशाब कम होना, कमज़ोरी, बदन में तेज दर्द, किसी काम करने में मन न लगना, जैसे लक्षण वयस्कों में दिखते हैं।
बीमारी का इलाज क्या है?
आमतौर पर सीजनल सर्दी-जुकाम 4-5 दिनों में अपने आप ठीक हो जाता है, लेकिन तकलीफ अधिक न हो इसके लिए एहतियात बरतें। सामान्य सर्दी-जुकाम में बेसिक दवा से काम चल जाता है।
सामान्य सर्दी जुकाम होने पर पैरासिटमोल ले और अगर दो दिनों तक लगातार बुखार न उतरे तो डॉक्टरों को दिखाएं। सर्दी जुकाम का सबसे अच्छा इलाज है भाप लेना। आप जुकाम को दूर करने के लिए भाप लें, काढ़े का सेवन करें और दूध में हल्दी डालकर पीएं।




























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