दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन गेट नंबर-1 के पास सोमवार, दिनांक 10 नवम्बर की शाम लगभग 06 :30 बजे एक कार में हुए बमब्लास्ट में 12 लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल होगए हैं। धमाके के बाद इलाके में भारी अफरातफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मौके पर चारों ओर धुआं और लाशों के टुकड़े बिखरे थे। सूचना मिलते ही 20 से अधिक फायर टेंडर, दिल्ली पुलिस, एनएसजी, एनआईए और फोरेंसिक टीमें मौके पर पहुंचीं।
सरकार ने इसे संभावित आतंकी हमला मानते हुए यूएपीए UAPA के तहत मामला दर्ज़ किया है। दिल्ली और मुंबई सहित बड़े शहरों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। (Delhi red fort terror attack)
बताया जा रहा है कि दिल्ली लाल किला (Delhi Terror Attack) कार ब्लास्ट के तार फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल से जुड़ रहे हैं और इस कार ब्लास्ट की गुत्थी को सुलझाने की कोशिश हो रही है। इस बीच पुलिस को जांच में नए-नए सुराग मिल रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि दिल्ली कार ब्लास्ट एक फिदायीन हमला था।
सूत्रों की माने तो Delhi Terror Attack में अपने तीन साथियों के पकड़े जाने के बाद डॉक्टर उमर ने कार में खुद को उड़ा लिया। कातिल डॉक्टर उमर मोहम्मद का कनेक्शन फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल से है। उस मामले में पहले से ही तीन डॉक्टरों की गिरफ़्तारी हो चुकी है। अब प्रश्न यह उठता है कि क्या चारों आतंकी एक-दूसरे से जुड़े हैं, क्या चारों की कोई बड़ी योजना थी?
दरअसल, दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट केस में कई खुलासे हो रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि तीनों डॉक्टरों के गिरफ़्तार होने से डॉक्टर उमर खौफजदा था और उसे डर था कि कहीं उसकी भी गिरफ़्तारी न होजाए। इस वजह से उसने पैनिक होकर हड़बड़ी में लाल किले के पास कार में खुद को उड़ा लिया। सीसीटीवी फुटेज में धमाके में इस्तेमाल जिस कार के ड्राइवर को फिदायीन हमले का संदिग्ध माना जा रहा है, वह कथित रूप से डॉक्टर मोहम्मद उमर है।
डॉ. उमर फरीदाबाद के अल फलह मेडिकल कॉलेज में तैनात था। पोल खुलने पर उसने गिरफ़्तारी के डर से दो सहयोगियों के साथ आनन-फानन में धमाके की प्लानिंग की और शाम होते-होते इसे अंजाम दे दिया। Delhi Terror Attack
सूत्रों के मुताबिक– फरीदाबाद कांड में जो तीन डॉक्टर अरेस्ट हुए हैं, वे अमोनियम नाइट्रेट की सप्लाई, बम बनाने की प्लानिंग और लॉजिस्टिक्स में शामिल हैं और ये चारों एक-दूसरे से जुड़े हैं। जांच से पता चला है कि ये सब एक ही टेरर नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं और इनका कनेक्शन जैश-ए-मोहम्मद से है।
कार में तीन लोग सवार थे– दिल्ली पुलिस सूत्रों का कहना है कि कार में तीन लोग सवार थे। कार का नंबर हरियाणा का है। कार वैसे कई बार खरीदी और बेची गई है। कार का आखिरी मालिक तारिक नाम का शख्स है, जो जम्मू-कश्मीर के पुलवामा ज़िले का निवासी है। इस तरह से दिल्ली ब्लास्ट का पुलवामा कनेक्शन भी दिख रहा है। सीसीटीवी फुटेज में जिस कार में धमाका हुआ वो कुछ देर पहले किसी पार्किंग से निकली दिखाई दे रही है।
जांच एजेंसियाँ जांच में जुटीं– जांच एजेंसियां विस्फोट की जांच में जुटी हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल कर धमाका किया गया। इससे पहले फरीदाबाद से जांच एजेंसियों ने एक आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया और करीब तीन क्विंटल अमोनियम नाइट्रेट बरामद किया था। जांच एजेंसियों को शक है कि दिल्ली विस्फोट के तार भी फरीदाबाद के आतंकी मॉड्यूल से जुड़े हैं।
Delhi Terror Attack कल शाम देश की राजधानी दिल्ली में आतंकवादियों ने बम विस्फोट किया जोकि पूरे विश्व के लिए चिंता की बात है। क्योंकि आतंकवाद से केवल भारत ही नही बल्कि पूरा विश्व प्रभावित है। आज अमेरिका इंग्लैंड,फ्रांस,स्वीडन,ऑस्ट्रेलिया सहित दुनिया का ऐसा कोई देश नहीं जिसे इस आतंकी वायरस ने जकड़ा न हो।
इस आतंकी वायरस से यदि कोई अछूता है तो वो है चीन। क्योंकि वहाँ धर्मनिरपेक्ष शासन व्यवस्था नहीं है,वहाँ फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन के नाम पर राष्ट्र के प्रतीकों, महापुरुषों और बहुसंख्यक नागरिकों के खिलाफ ज़हर उगलने की आजादी नहीं है। वहाँ सरकारी पैसे से चलने वाले मदरसाबोर्ड,अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय और जगह-जगह सरकारी भूमि पर बने अवैध मस्जिद-मदरसे और दरगाह नहीं हैं,जहाँ देश के संसाधनों का उपयोग केवल और केवल देशविरोधी जोम्बियों की फसल तैयार की जाती है।
लेकिन विश्व के सबसे बड़े और बेबस लोकतंत्र भारत में आज भी पाकिस्तान परस्त मुसलमान लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदार बनकर जनता द्वारा चुना जाता है, और फिर लोकतंत्र के मंदिर, संसद में खड़े होकर राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत और भारत के उन प्रतीकों का अनादर करता है, जिन्हें संवैधानिक दर्जा प्राप्त है। क्योंकि इनकी किताब इन्हें केवल इनके किताबी भाइयों और किताबी शासन से चलने वाले देश के प्रति ही वफादारी का आदेश देती है।
मुस्लिम जहाँ बहुसंख्यक हैं वहाँ पूरी तरह से इस्लामिक कानून लागू है, और अल्पसंख्यकों की जिंदगी नरक समान है। जबकि जहाँ वो अल्पसंख्यक हैं वहाँ लगातार जिहाद चलता रहता है, और उस जिहाद में जो जिस पेशे में है, उसी स्तर पर काफिरों को कमजोर करने की कोशिश में लगा रहता है। क्योंकि इस्लामिक नियम के हिसाब से ये सब करना जन्नत और 72 हूरों तक पहुंच पाने का एक आसान ज़रिया है।
आतंकवादियों के धर्म को लेकर देश में हमेशा ही विवाद रहा है। देश की सेक्युलर जमात कहती है कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, लेकिन फैक्ट कहता है कि हर आतंकवादी एक विशेष धर्म का ही होता है। आतंकियों का कोई धर्म नहीं होता यह कहने वाले भी ज्यादातर आतंकवादियों के मजहबी भाई ही होते हैं।
आतंकियों के शुभचिंतक पहले ये कहकर आतंकियों का बचाव करते थे कि देश मे रोजगार नही है इसलिए पैसे की लालच में युवा भटक जाते हैं। लेकिन अब पढ़े लिखे डॉक्टर, इंजीनियर,शिक्षक, साइंटिस्ट भी आतंकी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। और जो जिस फील्ड में है उसी फील्ड से जिहाद में किस तरह मदद कर सकता है इसकी भरपूर कोशिश करता है।
और इन सबके बाद भी हमारी सरकारें सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास जीतने के लिए देश के नागरिकों को बम ब्लास्ट का दंश झेलने के लिए अकेला छोड़ देती हैं।
धर्म के नाम पर ही भारत के तीन दुकड़े हुए एक पाकिस्तान दूसरा बांग्लादेश लेकिन उसके बाद भी आज न जाने देश के अंदर कितने अघोषित पाकिस्तान-बांग्लादेश बने हुए हैं,जहाँ भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने का पूरा तानाबाना रचा जाता है।
लेकिन फिर भी आज की वर्तमान सरकार पिछले सरकारों के पदचिन्हों का अनुसरण कर रही है जिसमें न तो देश सुरक्षित है और न ही देश का बहुसंख्यक हिन्दू समाज।
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