हमारी संस्कृति में भाई-बहन के स्नेह को समर्पित दो मुख्य पर्व हैं— पहला रक्षाबंधन और दूसरा भाई दूज। भाई दूज को यम द्वितीया भी कहते हैं। यह पर्व एक सांस्कृतिक परंपरा का पर्व ही नहीं है, वरन बहनों का अपने भाईयों के प्रति अटूट विश्वास का संगम है, जिसमें भाईयों की लम्बी उम्र की कामना बहनों के हृदय में छिपी रहती है। इस भारतीय संस्कृति की अक्षुण्यता का प्रतीक यह पर्व इस वर्ष 05 मार्च को मनाया जाएगा।
पौराणिक महत्त्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पर्व की शुरुआत यमराज और उनकी बहन यमुना से हुई थी। कहा जाता है कि कई बार बुलाने पर यमराज अपनी बहन यमुना के घर पहुंचे थे और यमुना ने प्रसन्न होकर भाई का तिलक किया तथा उन्हें स्वादिष्ट भोजन कराया। इसके बाद यमराज ने वरदान दिया कि जो भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाकर भोजन करेगा और तिलक करवाएगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा।
पर्व की विशेषताएं-
बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाती हैं और उनकी लंबी आयु की कामना करती हैं। भाई अपनी बहनों को स्नेहस्वरूप उपहार देते हैं। इस दिन भाई का बहन के घर भोजन करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
वर्तमान समय में जब एक-दूसरे से दूरियाँ बढ़ रही हैं, ऐसे समय में भाई दूज जैसे पर्व हमें अपनों के समीप लाते हैं और यह पर्व हमें याद दिलाता है कि समय चाहे कितना भी बदल जाए, भाई-बहन का नि:स्वार्थ प्रेम और एक-दूसरे के प्रति सुरक्षा का भाव सदैव बना रहना चाहिए।





























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