संकल्प शक्ति। आज रामनवमीके साथ ही ज्ञान का दिवस गुरुवार भी है। इस बार ये त्योहार त्रेतायुग जैसे तिथि और नक्षत्र के संयोग में मनेगा। श्रीराम का जन्म दोपहर में हुआ था, इसलिए रामनवमी की पूजा दिन में ही होती है।
वाल्मीकि रामायण के अनुसार, श्रीराम का जन्म चैत्र महीने के शुक्लपक्ष की नवमी तिथि और पुनर्वसु नक्षत्र में हुआ था। ऐसा ही संयोग इस बार आज 30 मार्च, गुरुवार को निर्मित है।
पुत्रकामेष्टि यज्ञ के फलस्वरूप
राजा दशरथ जब बहुत बूढ़े हो गए, तो संतान न होने के कारण चिंतित रहने लगे। उनकी चिन्ता देखकर ब्राह्मणों ने उन्हें पुत्रकामेष्टि यज्ञ करवाने की सलाह दी। महर्षि वशिष्ठ जी के कहने पर राजा दशरथ ने ऋषि शृंग को इस यज्ञ के लिए बुलाया। यज्ञ पूरा होने के बाद अग्निदेव प्रकट हुए और खीर से भरा सोने का घड़ा दशरथ को देते हुए रानियों को खीर खिलाने के लिए कहा। राजा दशरथ ने ऐसा ही किया। एक साल बाद चैत्र शुक्ल नवमी पर पुनर्वसु नक्षत्र में कौशल्या ने श्रीराम को जन्म दिया तथा पुष्य नक्षत्र में कैकई ने भरत और सुमित्रा से जुड़वा बच्चे लक्ष्मण और शत्रुघ्न हुए।




























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