धार। मांडू नगर एक पर्यटनस्थल है और यहाँ जलसंरक्षण की दिशा में भारतीय पुरातत्व सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआइ) काम करने के लिए प्राजेक्ट तैयार कर रही है। इसके लिए मांडू के दो स्पॉट चिह्नित किए गए हैं, जिनमें कभी पूरे साल पानी संरक्षित रहता था। लेकिन, देखरेख के अभाव में अब ये खंडहर हो गए हैं। अब इन्हें दोबारा पुनर्जीवित किया जाएगा। बताया गया कि इन जलसंरचनाओं को उन्हीं सामग्री से रिपेयर किया जाएगा, जिसका इस्तेमाल करके 14वीं शताब्दी में इन्हें बनाया गया था।
सर्वे का काम प्रारम्भ
केन्द्र द्वारा चलाए जा रहे जल जीवन मिशन के तहत पहली बार एएसआइ जल संरचनाओं को पुनर्जीवित करने का काम करेगा। एएसआइ मांडू के अधिकारी प्रशांत पाटनकर ने बताया कि मांडू के लाल बंगला और हाथी महल में मौज़ूद 14वीं शताब्दी की बावडिय़ों और अन्य जलसंरचनाओं को फिर से रिपेयर करने के लिए सर्वे किया जा रहा है, ताकि वर्षभर इसमें पानी रह सके।
जलसंरचनाओं को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से दो स्पॉट चिह्नित किए गए है। इनके लिए प्रपोजल बनाया जा रहा है।





























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