Homeआयुर्वेदगर्मियों में सुस्त पाचन और 'पित्त' को शांत करने वाला जादुई 'त्रिशूल'

गर्मियों में सुस्त पाचन और ‘पित्त’ को शांत करने वाला जादुई ‘त्रिशूल’

गर्मी में अक्सर थोड़ा सा भी खाना खाने पर पेट फूलने, खट्टी डकारें आने और सीने में भयंकर जलन (Acidity) की शिकायत होती है। पाचन की इस सुस्ती को दूर करने के लिए लोग अक्सर ‘कोल्ड ड्रिंक्स’ या ‘गैस की गोलियां’ लेते हैं, जो आंतों को हमेशा के लिए कमजोर कर देती हैं। 

प्राकृतिक चिकित्सा में इस समस्या के समाधान के लिए तीन साधारण बीजों का एक ऐसा अमृत बताया गया है, जो पेट की हर बीमारी का काल है— जीरा, धनिया और सौंफ।

त्रिदोषनाशक अर्क का विज्ञान

•धनिया (Coriander): इसकी तासीर अत्यंत शीतल होती है। यह आंतों की सूजन और भड़के हुए ‘पित्त’ (तेजाब) को तुरंत पानी की तरह शांत कर देता है।

•जीरा (Cumin): यह सुस्त पड़ी ‘जठराग्नि’ को जगाता है और पेट में फंसी हुई जिद्दी गैस (वात) को तोड़कर बाहर निकालता है।

•सौंफ (Fennel): यह आंतों की मांसपेशियों को रिलैक्स (Relax) करती है और भोजन को पचाकर शरीर को ठंडक प्रदान करती है।

मेरी राय में: अपनी रसोई में छिपे इस प्राकृतिक औषधालय को पहचानें। गैस और एसिडिटी को रसायनों से दबाने के बजाय इन तीन बीजों से जड़ से खत्म करें। जब आपका पेट बिल्कुल हल्का और शांत होगा, तो आपकी ‘जीवनी शक्ति’ बिना किसी रुकावट के अपने मार्ग पर दौड़ेगी।

दादी माँ का अचूक प्राकृतिक नुस्खा

गर्मियों की ‘पाचक चाय’ (CCF Tea): एक कांच के गिलास में 1 चम्मच साबुत धनिया, आधा चम्मच जीरा और 1 चम्मच मोटी सौंफ रात को सादे पानी में भिगो दें। सुबह इस पानी को हल्का सा उबाल लें (या बिना उबाले केवल मसल कर छान लें)। इसमें धागे वाली मिश्री मिला लें। सुबह खाली पेट इसे पीने से भयंकर से भयंकर एसिडिटी, पेट का भारीपन और गर्मियों में होने वाला सिरदर्द (Migraine) 3 दिन में खत्म होने लगता है।

    भ्रांति (Myth): गर्मियों में पेट की गर्मी शांत करने के लिए हमेशा एकदम ‘बर्फ’ जैसा ठंडा पानी या शर्बत ही पीना चाहिए, उबली हुई चीजें (चाय/काढ़ा) नुकसान करती हैं।

     सच (Fact): बर्फ का ठंडा पानी पेट की नसों को ‘शॉक’ देकर सिकुड़ा देता है, जिससे पाचन पूरी तरह रुक जाता है! जीरा-धनिया-सौंफ का यह पानी भले ही हल्का गुनगुना पिया जाए, लेकिन पेट में जाने के बाद इसकी ‘तासीर’ (Potency) ‘शीतवीर्य’ (ठंडी) होती है। यह शरीर को बाहर से नहीं, बल्कि भीतर की कोशिकाओं (Cells) से ठंडा करता है, जो असली और स्थायी ठंडक है।

कार्यकारी संपादक,  बृजपाल सिंह चौहान (एन. डी.) नेचुरोपैथी

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