गर्मी से बेहाल होकर जब हम फ्रिज से निकालकर कोई ‘कार्बोनेटेड’ (गैस वाला) कोल्ड-ड्रिंक गटागट पीते हैं, तो गले में जो झनझनाहट होती है, उसे हम ‘ठंडक’ समझ बैठते हैं। लेकिन प्राकृतिक चिकित्सा और आधुनिक विज्ञान के अनुसार, यह ठंडक नहीं, बल्कि आपके गले और आंतों के छिलने की चीख है। कोल्ड-ड्रिंक्स में मौजूद ‘कार्बन डाइऑक्साइड’ (Carbon dioxide) और ‘फॉस्फोरिक एसिड’ (Phosphoric acid) इसे टॉयलेट क्लीनर जितना ही एसिडिक (तेजाबी) बना देते हैं।
मेरी राय में: प्यास बुझाने के लिए जहर का घूंट न पिएं। अपने शरीर रूपी मंदिर में रसायनों और कार्बन गैस को प्रवेश न करने दें। मटके का शुद्ध जल ही जीवन है। जब शरीर में प्रकृति का शुद्ध जल बहेगा, तो आपकी ‘जीवनी शक्ति’ कभी एसिडिटी या क्रोध का शिकार नहीं होगी।
दादी माँ का अचूक प्राकृतिक नुस्खा
मटके का ‘सुगन्धित और क्षारीय जल’: यदि गर्मियों में कुछ बहुत ही शीतल और स्वादिष्ट पीने का मन करे, तो मटके के पानी में रात को थोड़ी सी ‘खस’ (Vetiver) की जड़ें और 2-4 ताजे गुलाब की पंखुड़ियां डाल दें। यह पानी न केवल प्राकृतिक रूप से ठंडा होगा, बल्कि यह पूर्णतः क्षारीय (Alkaline) होगा। यह शरीर के एसिड को काटेगा और हृदय को ऐसी शांति देगा जो कोई महंगी कोल्ड-ड्रिंक नहीं दे सकती।
कार्यकारी संपादक, बृजपाल सिंह चौहान (एन. डी.) नेचुरोपैथी




























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