Homeजनजागरणसात्विक-सरल जीवन में ही ‘माँ’ की कृपा निहित है: बहन पूजा शुक्ला

सात्विक-सरल जीवन में ही ‘माँ’ की कृपा निहित है: बहन पूजा शुक्ला

जौनपुर। संकल्प शक्ति। ऋषिवर सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के आशीर्वाद से भगवती मानव कल्याण संगठन एवं पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम ट्रस्ट के संयुक्त तत्त्वावधान में दिनांक 22-23 मई 2026 को बरन वाल मैरिज हॉल, डोभर, जौनपुर, उत्तरप्रदेश में 24 घंटे का श्री दुर्गाचालीसा अखंड पाठ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम के शुभारम्भ में उपस्थित सभी भक्तों ने सामूहिक रूप से ‘माँ’-गुरुवर के जयकारे लगाए।

कार्यक्रम की समापन बेला पर भगवती मानव कल्याण संगठन की केन्द्रीय अध्यक्ष शक्तिस्वरूपा बहन सिद्धाश्रमरत्न पूजा शुक्ला जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि ‘‘परम पूज्य सद्गुरुदेव जी महाराज ने आप सभी को अपना पूर्ण आशीर्वाद प्रदान किया है। माता भगवती आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा की साधना-आराधना में बहुत बड़ी शक्ति है। हम सामाजिक प्राणी हैं और जीवन में अनेक समस्याएं आती रहती हैं, जिनके समाधान के लिए हम दर-दर भटकते रहते हैं, लेकिन कोई निदान नहीं मिलता। यदि समस्याओं का समाधान पाना है, तो अपनी आत्मा की मूल जननी, अपनी इष्ट माता जगदम्बे की साधना-आराधना करें, लेकिन इससे पहले आपको पात्र बनना पड़ेगा और पात्र बनने के लिए अपने मन से हर बुराई का परित्याग करना पड़ेगा। क्योंकि सात्विक-सरल जीवन में ही ‘माँ’  की कृपा निहित है। तो, छल-कपट, झूठ-फरेब, ईर्ष्या-द्वेष व सभी प्रकार के विकारों से दूर रहें और कर्त्तव्यकर्म करते हुए ‘माँ’ की भक्ति में मन लगाएं।

मुझे गर्व है कि भगवती मानव कल्याण संगठन के कार्यकर्ता परम पूज्य गुरुवरश्री के निर्देश पर अपने घर-परिवार के उत्तरदायित्त्वों का निर्वहन करते हुए समाजकल्याण की दिशा में अग्रसर हैं। जगह-जगह श्री दुर्गाचालीसा का पाठ करवा रहे हैं, लोगों को नशे-मांसाहार से मुक्त चरित्रवान् जीवन जीने हेतु प्रेरित कर रहे हैं और इससे समाज में व्यापक परिवर्तन परिलक्षित है। आप अपने घर में माता भगवती की साधना-आराधना करें। परम पूज्य गुरुवरश्री ने बहुत ही सहज-सरल साधनाक्रम प्रदान किए हैं। गुरुवरश्री की विचारधारा अनुरूप चलकर आप अपने जीवन में परिवर्तन ला सकते हैं, इतना ही नहीं, परम पद को प्राप्त कर सकते हैं।

हमें आत्मकल्याण के साथ जनकल्याण भी करना है। हमें समाज को बताना है कि ‘माँ’ की साधना-आराधना और नशे-मांसाहार से मुक्त चरित्रवान् और कर्ममय जीवन ही हमें कलिकाल के भयावह वातावरण से मुक्ति दिला सकता है।’’

संगठन के केन्द्रीय महासचिव सिद्धाश्रमरत्न अजय अवस्थी जी ने अपनी चिरपरिचित शैली में कहा कि ‘‘आज यहाँ 24 घंटे तक ‘माँ’ का गुणगान चला, ‘माँ’-गुरुवर की दिव्य आरती हुई। कोई भी अच्छा कार्य माता भगवती की इच्छा के बिना पूर्ण नहीं हो सकता। पहले ही यह निश्चित हो चुका होता है कि कब, कहाँ ‘माँ’ का गुणगान होगा? और वहाँ कौन-कौन उपस्थित होगा और इन दिव्य कार्यक्रमों में उपस्थित होने के लिए पात्रता की ज़रूरत होती है। जौनपुर ज़िले के 52 लाख लोगों में से  इस दिव्य अनुष्ठान में शामिल होने के लिए माता भगवती ने केवल आप लोगों को पात्रता दी, इसके पीछे कोई-न-कोई कारण अवश्य होगा? हो सकता है कि ‘माँ’ आपसे समाजहित में कोई बहुत बड़ा कार्य कराना चाह रहीं हों।

 भाईयों-बहनों, यह हमारा बहुत बड़ा सौभाग्य है कि इस दिव्य अनुष्ठान में हम लोग इतनी बड़ी संख्या में सम्मिलित हो सके।  हमें हमेशा यह ध्यान रखना चाहिए कि कोई भी ईश्वरीय कार्य बिना कारण के नहीं हो सकता। भगवती मानव कल्याण संगठन हमारे भारत देश के 182 ज़िलों और विश्व के 13 देशों में नि:शुल्क, नि:स्वार्थ सेवाभाव से कार्य कर रहा है, जिससे जन-जन में नवचेतना का संचार हो सके और लोग नशे-मांसाहार व चरित्रहीनता जैसी बुराईयों से दूर होकर आत्मकल्याण व जनकल्याण करने के साथ ही अपने राष्ट्र की प्रगति में सहभागी बन सकें।’’

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