नई दिल्ली/भोपाल। मध्यप्रदेश के करीब 1.5 लाख सरकारी शिक्षकों को देश की सर्वोच्च अदालत से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से जुड़े मामले पर सुनवाई करते हुए किसी भी प्रकार की अतिरिक्त छूट देने से साफ इंकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पात्रता परीक्षा के नियमों में जो भी ढील दी जानी थी, वह पहले ही दी जा चुकी है, इसलिए अब बिना यह परीक्षा पास किए कोई भी शिक्षक नहीं बन सकता है और न ही सेवा में बना रह सकता है।
वर्ष 1998 से 2009 के बीच नियुक्त हुए शिक्षकों को पात्रता परीक्षा से छूट देने की मांग वाली विभिन्न समीक्षा याचिकाओं पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि जिन इन-सर्विस शिक्षकों की सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) में 05 वर्ष से कम का समय शेष है, उन्हें अनुच्छेद 142 के तहत पहले ही छूट दी जा चुकी है।
समयसीमा तय: शेष बचे सभी कार्यरत शिक्षकों को निर्धारित समयावधि (2 वर्ष) के भीतर हर हाल में टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी, अन्यथा उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकती है।




























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