डिजिटल बैंकिंग के इस दौर में साइबर अपराधी अब आपके बैंक पासवर्ड या ओटीपी चुराने की बजाय सीधे आपके मोबाइल नंबर पर कब्जा कर रहे हैं। ‘सिम स्वैप’ नाम का यह नया स्कैम देशभर में तेजी से पैर पसार रहा है, जिससे पीड़ितों का बैंक खाता चंद मिनटों में खाली होजाता है।
क्या है सिम स्वैप स्कैम?
सिम स्वैप का सीधा अर्थ है, आपके मोबाइल नंबर का दूसरा सिम कार्ड जारी करवा लेना। इस प्रक्रिया में अपराधी टेलीकॉम कंपनी का प्रतिनिधि बनकर आपको फोन करते हैं या फिशिंग लिंक भेजते हैं। वे नेटवर्क अपग्रेड जैसे 4जी से 5जी के बहाने आपसे आपके सिम कार्ड का यूनिक नंबर और कुछ निजी जानकारियां हासिल कर लेते हैं। एक बार जानकारी मिलते ही वे आपके नाम पर नया सिम एक्टिवेट करा लेते हैं और आपका मूल सिम ‘ब्लॉक’ होजाता है।
मिनटों में हो जाता है खेल
जैसे ही अपराधी के पास आपके नंबर का एक्टिव सिम पहुंचता है, उसे आपके बैंक खाते का पूर्ण नियंत्रण मिल जाता है। चूंकि बैंकिंग ट्रांजेक्शन के लिए ओटीपी उसी मोबाइल नंबर पर आता है, अपराधी आसानी से पासवर्ड बदलकर पैसे ट्रांसफर कर लेते हैं। जब तक यूजर को सिम बंद होने का एहसास होता है, तब तक खाता साफ हो चुका होता है।
बचाव के लिए इन बातों का रखें ध्यान-
अचानक सिग्नल जाना: यदि आपके फोन का सिग्नल अचानक गायब हो जाए और लंबे समय तक न आए, तो तुरंत टेलीकॉम ऑपरेटर से संपर्क करें।
निजी जानकारी साझा न करें: किसी भी अनजान कॉल पर अपने सिम कार्ड के पीछे लिखे नंबर या आधार जैसी जानकारियां न दें।
संदिग्ध लिंक से बचें: लॉटरी या केवाईसी अपडेट के नाम पर आने वाले एसएमएस लिंक पर क्लिक न करें।
सोशल मीडिया पर सावधानी: अपनी जन्मतिथि और मोबाइल नंबर जैसी संवेदनशील जानकारी सोशल मीडिया पर सार्वजनिक न करें।
विशेषज्ञों की राय
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि सिम स्वैप से बचने के लिए ‘टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन ‘ के लिए केवल एसएमएस पर निर्भर न रहें, बल्कि गूगल ऑथेंटिकेटर जैसे ऐप्स का उपयोग करें। साथ ही, बैंक अलर्ट के लिए ईमेल आईडी को भी अपडेट रखें, ताकि मोबाइल बंद होने पर भी आपको ट्रांजेक्शन की सूचना मिलती रहे।




























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