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कष्टों से बचना है, तो अच्छे कर्मों की ओर प्रवृत्त होना पड़ेगा : अजय अवस्थी

मुंगेली, छत्तीसगढ़। सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के आशीर्वाद से चैत्र नवरात्र की तृतीया व चतुर्थी तिथि, दिनांक 21-22 मार्च को बी.आर.साव स्कूल ग्राउण्ड, ज़िला-मुंगेली, छत्तीसगढ़ में 24 घंटे का श्री दुर्गाचालीसा अखंड पाठ हज़ारों भक्तों की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम के शुभारम्भ में भक्तों ने सामूहिक रूप से ‘माँ’-गुरुवर के जयकारे लगाए।

इस अनुष्ठान की समापन बेला पर भगवती मानव कल्याण संगठन के केन्द्रीय महासचिव सिद्धाश्रमरत्न अजय अवस्थी जी ने उपस्थित भक्तों को सम्बोधित करते हुए अपनी चिरपरिचित शैली में कहा, ‘‘माता भगवती आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा हमारी ही नहीं, अपितु समस्त ब्रह्मांड की जननी हैं और वे सर्वत्र व्याप्त हैं। परम पूज्य गुरुदेव जी के आशीर्वाद के फलस्वरूप, इन अखण्ड पाठों के माध्यम से, जनजागरण के माध्यम से हम ‘माँ’ की कृपा प्राप्त करते हैं। यह वह अनुष्ठान है, जिसे यदि किसी मंदिर में 05 घंटे या 24 घंटे करा दिया जाए, तो वहाँ की मूर्तियाँ जीवंत हो उठेंगी।

यह एक अनुष्ठान ही नहीं, वरन यह अपने अवगुणों को त्यागने का दिन है, अवगुणों का त्याग करने हेतु संकल्प लेने का दिन है। अवगुणों को त्यागने का इससे अच्छा अवसर आपको कभी नहीं मिलेगा।

अपनी इष्ट से, ‘माँ’ से लोग क्या मांगते हैं? भौतिक सम्पत्ति, कार, बंगला! अरे, इस धरती पर जहाँ हम बैठे हैं, ऐसी करोड़ों धरती इस ब्रह्मांड में माता भगवती ने दे रखी हैं और आप इतनी छोटी चीजें मांग रहे हो। यह तो वही हुआ कि आप देश के प्रधानमंत्री से मांगो कि हमारे घर में पंखा लगवा दो! अरे, ‘माँ’ से मांगना ही है, तो भक्ति, ज्ञान और आत्मशक्ति का वरदान मांगो। इनमें दुनियाभर की धन-सम्पत्ति समाहित है और ये सम्पत्तियाँ इस जन्म में ही नहीं, वरन् आने वाले कई जन्मों तक काम आएंगी। भक्ति, ज्ञान और आत्मशक्ति को यदि आपने अपने जीवन में साध लिया, तो समझिए आपका जीवन धन्य होगया। 

यह शाश्वत सत्य है कि बुरे कर्मों का दण्ड भोगना ही पड़ता है और उसे दुनिया की कोई ताक़त रोक नहीं सकती है। अत: सावधान होजाएं और अच्छे कर्मों की ओर प्रवृत्त हों, जिससे आने वाले दारुण कष्टों से बच सको। परिलक्षित है कि कोई भी अपने अवगुणों को छोड़ नहीं पा रहा है, इसीलिए लोग कष्टों, परेशानियों व समस्याओं से ग्रसित हैं और यदि कष्टों से, परेशानियों से, आने वाली समस्याओं से बचना है, तो अपने अवगुणों को त्यागना होगा।’’

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