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‘चैत्र नवरात्र’ का उपवास: 9 दिन की यह तपस्या कैसे करती है पूरे शरीर का कायाकल्प?

हम अक्सर त्योहारों को केवल धर्म और आस्था से जोड़कर देखते हैं, लेकिन भारतीय पंचांग के हर त्योहार के पीछे एक बहुत बड़ा ‘मेडिकल साइंस’ (चिकित्सा विज्ञान) छिपा है। वसंत और गर्मियों के बिल्कुल बीचों-बीच (मार्च-अप्रैल) आने वाली ‘चैत्र नवरात्र’ इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। यह वह समय है जब मौसम तेजी से बदलता है और इम्युनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) सबसे निचले स्तर पर होती है।

हमारे ऋषियों ने इस ‘ऋतु संधि’ में बीमारियों से बचाने और लिवर की 100% सफाई (Overhauling) के लिए ही 9 दिन के ‘उपवास’ (Fasting) का कड़ा नियम बनाया था।

9 दिन का उपवास और ‘ऑटोफैगी’ (Autophagy)

जब हम 9 दिनों तक अन्न (गेहूं, चावल, भारी अनाज) और गरिष्ठ भोजन छोड़ देते हैं, तो हमारे पाचन तंत्र और लिवर को भारी काम से ‘लंबी छुट्टी’ मिल जाती है।

• इस खाली समय में शरीर की ‘प्राण ऊर्जा’ भोजन पचाने के बजाय शरीर की ‘मरम्मत’ (Healing) में लग जाती है।

• आधुनिक विज्ञान इसे ‘ऑटोफैगी’ कहता है— यानी शरीर की स्वस्थ कोशिकाएं, बीमार और कैंसर पैदा करने वाली कोशिकाओं (Toxins) को खुद ही खाकर नष्ट कर देती हैं। 9 दिन के इस फलाहार से लिवर का फैट पिघल जाता है और वह गर्मियों के लिए पूरी तरह तैयार हो जाता है।

दादी माँ का अचूक प्राकृतिक नुस्खा

चैत्र नवरात्र का सबसे उत्तम ‘फलाहार’: गर्मियों की शुरुआत में उपवास के दौरान शरीर में पानी की कमी (Dehydration) हो सकती है। इसलिए कुट्टू के पकोड़े या तली हुई चीजें खाने से बचें (यह उपवास नहीं, उपहास है)। दिन में कम से कम दो बार ‘नारियल पानी’ या ‘नींबू-शहद का रस’ पिएं। खाने में पपीता, सेब और मखाने का प्रयोग करें। पपीता आंतों और लिवर की सबसे बेहतरीन प्राकृतिक ‘झाड़ू’ है, जो 9 दिन में आंतों को शीशे की तरह चमका देता है।

🔍स्वास्थ्य भ्रांति और सच (Myth vs. Fact)

• भ्रांति (Myth): नवरात्रि के उपवास में सेंधा नमक के साथ खूब सारा साबूदाना (Sago) और आलू खाना चाहिए, इससे पेट भरा रहता है और ताकत आती है।

• सच (Fact): साबूदाना कारखानों में केमिकल प्रोसेस से बनता है और यह शुद्ध ‘स्टार्च’ (Starch) है। यह आंतों में चिपकता है और लिवर पर भारी दबाव डालता है। आलू और साबूदाने का अधिक सेवन वजन बढ़ाता है और पित्त (एसिडिटी) पैदा करता है। असली उपवास ‘हल्के’ (Light) आहार से होता है। यदि कुछ पकाना ही है, तो ‘समा के चावल’ (Barnyard Millet) की पतली खिचड़ी खाएं, जो पचने में दुनिया का सबसे हल्का अनाज है।

शोधन: चैत्र नवरात्र को केवल एक धार्मिक कर्मकांड न मानकर अपने शरीर और मन के ‘शोधन’ (Detoxification) का अवसर मानें। जब 9 दिन के बाद आपका शरीर भीतर से पूरी तरह शुद्ध होगा, तो आपकी ‘जीवनी शक्ति’ माता के आशीर्वाद के समान ऊर्जावान और अडिग हो जाएगी।

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