प्रकृति का एक अटल नियम है- परिवर्तन। जैसे ही सर्दियां विदा लेती हैं और वसंत ऋतु का आगमन होता है, पेड़ों पर नए पत्ते आने लगते हैं। ठीक इसी तरह, हमारा शरीर भी इस बदलते मौसम में अपनी पुरानी कोशिकाओं को हटाकर एक नई ऊर्जा का संचार करता है। प्राकृतिक चिकित्सा का सबसे अहम सिद्धांत यह है कि शरीर अपना सबसे बड़ा डॉक्टर स्वयं है। यदि हम आध्यात्मिक शांति और प्राकृतिक नियमों का पालन करें, तो बड़ी से बड़ी बीमारियां शरीर से खुद-ब-खुद बाहर हो जाती हैं।
इस बदलते मौसम में सर्दी, खांसी या थकान होना कोई बीमारी नहीं, बल्कि शरीर द्वारा अंदर की गंदगी को बाहर निकालने की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। आइए जानते हैं कि इस मौसम में हम प्रकृति के साथ कदम से कदम कैसे मिला सकते हैं?
1. पाचन तंत्र को दें आराम
सर्दियों में हमारी जठराग्नि (पाचन शक्ति) तेज होती है, इसलिए हम भारी और गरिष्ठ भोजन आसानी से पचा लेते हैं, लेकिन मौसम गर्म होते ही पाचन धीमा होने लगता है। इस समय हमें अपने पेट को आराम देना चाहिए। भोजन में कम से कम 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा कच्चे सलाद (खीरा, ककड़ी, टमाटर) और ताजे मौसमी फलों का रखें। कच्चा आहार आंतों की अंदरूनी सफाई करने वाले ‘झाड़ू’ की तरह काम करता है।
2. जल चिकित्सा : फ्रिज को कहें ना, मटके को हां
गर्मियों की शुरुआत के साथ ही ठंडा पानी पीने की इच्छा होने लगती है। लेकिन फ्रिज का चिल्ड पानी हमारे गले की नसों और पेट की आंतों को सिकोड़ देता है, जिससे कब्ज और एसिडिटी बढ़ती है। इसकी जगह मिट्टी के घड़े (मटके) या तांबे के बर्तन का पानी पिएं। सुबह उठकर बिना कुल्ला किए एक से दो गिलास हल्का गुनगुना पानी बैठकर घूंट-घूंट पीने से शरीर का सारा कचरा पसीने और मल-मूत्र के जरिए साफ हो जाता है।
3. धूप और ताजी हवा (प्राणवायु)
सुबह की हल्की धूप केवल विटामिन-डी का स्रोत नहीं है, बल्कि यह शरीर की ‘बैटरी’ को रिचार्ज करती है। सुबह के समय 15-20 मिनट नंगे पैर हरी घास पर चलने से शरीर की अतिरिक्त गर्मी शांत होती है और मानसिक तनाव छूमंतर हो जाता है।
दादी माँ का अचूक प्राकृतिक नुस्खा
बदलते मौसम में गले की खराश या कफ होने पर दवाइयों से उसे दबाएं नहीं। रात को सोने से पहले आधा चम्मच ताजे अदरक के रस में एक चम्मच शुद्ध शहद मिलाकर धीरे-धीरे उंगली से चाट लें। इसके बाद पानी बिल्कुल न पिएं। यह प्राकृतिक एंटीबायोटिक आपके गले की सूजन को रात भर में शांत कर देगा।
संकल्प लें…
स्वास्थ्य कोई ऐसी वस्तु नहीं है, जिसे हम बाजार से खरीद सकें, यह तो प्रकृति के नियमों के साथ सही तालमेल बिठाकर अर्जित किया जाने वाला खजाना है। आज ही संकल्प लें कि आप अपनी दिनचर्या में इन छोटे और सरल प्राकृतिक बदलावों को शामिल करेंगे। जब शरीर भीतर से स्वच्छ और ऊर्जावान रहेगा, तभी हमारा मन भी आध्यात्मिक रूप से शांत और मजबूत बनेगा।





























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