पंचांग के अनुसार, चालू वर्ष 2026 में शीतला अष्टमी 11 मार्च 2026 को है। हालांकि, कई क्षेत्रों में हर माह की कृष्णपक्ष की अष्टमी को शीतला माता की पूजा का विधान है।
हमारे देश की आम जनमानस में शीतला माता को चेचक, खसरा और अन्य तापजनित रोगों से मुक्ति दिलाने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। शीतला अष्टमी, जिसे उत्तर भारत में ‘बसोड़ा’ भी कहा जाता है। यह पर्व जहाँ स्वच्छता का बढ़ावा देता है, वहीं ऋतु परिवर्तन के समय स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का संदेश देता है।
इस पर्व की सबसे अनूठी विशेषता यह है कि माता को अर्पित किया जाने वाला शीतल नैवेद्य, परंपरागत रूप से इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता। एक दिन पहले (सप्तमी को) तैयार किया गया भोजन ही अष्टमी के दिन माता को चढ़ाया जाता है और परिवार के सदस्य उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं और गर्मियों की शुरुआत में बासी भोजन करने की यह अंतिम तिथि मानी जाती है, जिसके बाद बढ़ते तापमान के कारण भोजन जल्दी खराब होने लगता है।
आरोग्यता प्रदान करती हैं शीतला माता
शीतला माता का स्वरूप: मां शीतला नीम के पत्तों से सुसज्जित, हाथ में कलश और झाड़ू लिए, गधे की सवारी पर विराजमान हैं। यह स्वरूप स्वच्छता और शुद्धता का प्रतीक है।
भोग प्रसाद: पूजा में दही, रबड़ी, बाजरे की रोटी और मीठे चावल का विशेष महत्त्व है।
नीम का प्रयोग: माता की पूजा में नीम के पत्तों का उपयोग किया जाता है, जो अपने औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है।
मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक शीतला माता का व्रत और पूजन करता है, उसका परिवार ज्वर, संक्रमण और त्वचा रोगों से मुक्त रहता है।




























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