अशोक का वृक्ष आम के वृक्ष के बराबर 20 से 30 फुट तक ऊँचा होता है। इसकी दो जातियाँ पाई जाती हैं, जिसमें जोनेसिया अशोक को ही असली अशोक मानते हैं। अशोक सदैव हरा भरा रहता है। इसमें बहुत सी शाखायें होने के कारण छाया घनी रहती है और इसके पत्ते प्रारम्भावस्था में कोमल स्वेताभ, हल्के लाल रंग के होते हैं, जो बाद में गहरे हरे रंग के होजाते हैं। अशोक के पुष्प गुच्छों में लगते हैं, जो नारंगी और लाल रंग के अतिसुन्दर व सुगन्धित होते हैं और इसकी फलियाँ 05 से 10 इंच तक लम्बी तथा 01 से 02 इंच तक चौड़ी होती हैं। फली के अन्दर 04 से 10 तक बीज होते हैं। इसके फल वैशाख-जेठ में लगते हैं। अशोक की छाल का ऊपरी छिलका मोटा होता है और उस छिलके को गोदने पर सफेद रस निकलता है, जो हवा के सम्पर्क में आने पर लाल रंग का होजाता है।
औषधीय उपयोग
स्मरणशक्ति बढ़ाए: अशोक की छाल का चूर्ण, ब्राम्ही बूटी का चूर्ण, मीठी बच का चूर्ण बना लें और इन सबको मिलाकर एक चम्मच पाउडर गाय के दूध के साथ रात्रि में सोते समय लगातार 90 दिन तक लें, इस दूध में आप मिश्री भी मिला लें, तो अधिक लाभप्रद रहेगा। इससे बच्चों की स्मरणशक्ति बढ़ती है, बड़ों की बुद्धि बढ़ती है तथा गर्मी से होने वाला सर दर्द भी सही होता है।
सावधानी– दवा सेवन के समय, तली हुई चीजें, लाल मिर्च, बैंगन, गरिष्ट पदार्थ, ठंडा बोतल वाला पेय आदि न खायें तथा हल्का एवं सुपाच्य भोजन करें।
प्रदर रोग: अशोक की छाल का चूर्ण 50 ग्राम, अशोक के फूलों का चूर्ण 50 ग्राम, रसोंत का चूर्ण 50 ग्राम, साठी चावल का चूर्ण 50 ग्राम, इलायची के दानों का चूर्ण 20 ग्राम, इन सब को पीसकर एक डिब्बे में रख लें और नित्यप्रति सुबह एक चम्मच इस चूर्ण को लेकर उसमें 20 किशमिश, 20 ग्राम केले की जड़ का कंद और 10 ग्राम मिश्री लेकर पत्थर की सिल में पीसकर आधा गिलास शर्बत बनाकर 200 ग्राम गाय के दूध के साथ मिलाकर खाली पेट एवं रात्रि में सोते समय पीने से श्वेत प्रदर एवं रक्त प्रदर में आराम मिलता है।
स्वप्नदोष: अशोक की छाल का चूर्ण तथा सफेद मूसली इन दोनों को मिलाकर पीसकर एक डिब्बे में रख लें और एक चम्मच पाउडर सुबह एवं रात्रि में सोते समय गाय के मिश्री मिले दूध के साथ सेवन करने से स्त्रियों को होने वाला स्वप्नदोष सही होता है।
मासिक धर्म: अशोक की छाल 50 ग्राम, इसे कूटकर 300 ग्राम पानी में डालें और आग में धीमी आंच में पकायें। जब पानी 100 ग्राम शेष रहे, तो उसमें 200 ग्राम गाय का दूध तथा 20 ग्राम मिश्री डालकर 10 मिनट और पकाएं, फिर छानकर सुबह खाली पेट पियें। इस काढ़े के सेवन से कुछ महीनों में मासिक धर्म अनियमित नहीं रहता। इसके साथ ही कई कंपनियों का अशोकारिष्ट बना हुआ आता है, वह भी इस रोग में लाभदायक है।
अस्थि भंग: अशोक की छाल का चूर्ण 05 ग्राम, हरसिंगार की पत्ती का चूर्ण 02 ग्राम, इन्हें मिलाकर 15 दिन गाय के दूध के साथ खाने से टूटी हड्डी जुड़ जाती हैं और धीरे-धीरे दर्द भी समाप्त होजाता है।
सावधानी
अगर किसी की हड्डी टूट जाये, तो पहले प्लास्टर बंधवाकर ही इस दवा का सेवन करें, अन्यथा हड्डी ग़लत जगह जुड़ सकती है।




























Views Today :
Views Last 7 days : 102
Views Last 30 days : 831
Views This Year : 8222
Total views : 108695
Who's Online : 0
Your IP Address : 162.251.85.8