सर्दियों की शुरुआत के साथ शरीर दर्द की समस्या परेशान करने लगती है। ज़्यादातर लोग हड्डियों और जोड़ों के दर्द से परेशान रहते हैं और सुबह से ही ये दिक्कतें परेशान करने लगती हैं। दरअसल, सर्द हवाओं के साथ ब्लड सकुर्लेशन स्लो पड़ने लगता है और हड्डियों व जोड़ों में नमी की कमी होने लगती है जिससे खिंचाव होता है, घर्षण बढ़ता है और दर्द परेशान करने लगता है। ऐसे में आपको सबसे पहले तो उन चीजों को करना चाहिए जो कि ब्लड सकुर्लेशन को तेज करने के साथ हड्डियों में गर्मी पैदा करे, जिससे दर्द और घर्षण में कमी आए। ऐसे में गर्म चीजों का सेवन मददगार हो सकता है, लेकिन क्या पिप्पली का पानी इस स्थिति में मददगार हो सकता है?
विषय विशेषज्ञ बतलाते हैं कि हड्डियों में दर्द होने पर पिप्पली का पानी पीना बेहद कारगर है। हड्डियों और जोड़ों में दर्द की समस्या आजकल गलत खानपान, बढ़ती उम्र, वात दोष के बढ़ने और शारीरिक कमजोरी के कारण आम होती जा रही है। ऐसे में पिप्पली (लंबी मिर्च) का पानी एक सहायक घरेलू उपाय के रूप में उपयोगी माना जाता है।
करता है वात और कफ दोष को संतुलित
आयुर्वेद में पिप्पली को वात और कफ दोष को संतुलित करने वाली औषधि बताया गया है। दरअसल, इन दोनों दोषों का असंतुलन हड्डियों और जोड़ों के दर्द का कारण बन सकता है। ऐसे में जब आप पिप्पली का पानी पीते हैं तो ये दोनों को बैलेंस करने के साथ हड्डियों के दर्द को कम करने में मदद करता है।
अकड़न व सूजन कर करे
पिप्पली का गुनगुना पानी शरीर में सूजन कम करने के साथ शरीर में गर्मी बढ़ाने का काम और अकड़न को कम करने में मदद कर सकता है, खासकर सुबह खाली पेट सीमित मात्रा में लेने पर। इससे ब्लड सकुर्लेशन में तेजी आती है और शरीर दर्द कम होने लगता है जिससे व्यक्ति बेहतर महसूस करता है।
कब और कैसे करें पिप्पली के पानी का सेवन?
पिप्पली के पानी का सेवन आप सुबह खाली पेट या फिर शाम के समय कर सकते हैं। आपको करना ये है कि पिप्पली को पानी में डालकर उबाल लें और फिर इसे छान लें। आप इसमें थोड़ा सा टेस्ट लाने के लिए सेंधा नमक या काला नमक भी मिला सकते हैं जिससे इसे पीना आपके लिए आसान हो जाएगा।
अधिक मात्रा नुक़सानदायक
ज़्यादा मात्रा में पिपली लेने से पेट में जलन, एसिडिटी या गर्मी की समस्या हो सकती है। इसलिए गठिया, गंभीर हड्डी रोग, गर्भवती महिलाएं या पहले से दवाएं ले रहे मरीज इसे अपनाने से पहले डॉक्टर या आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। संतुलित डाइट, कैल्शियम, विटामिन डी और नियमित हल्का व्यायाम भी ज़रूरी है।




























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